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बलरामपुर में इलाज के बाद तीन साल के मासूम की मौत, पहले भी कई लोगों की जा चुकी है जान

बलरामपुर, 20 अगस्त । बलरामपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में बिना आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता के इलाज करने वालों पर कार्रवाई का सवाल एक बार फिर गंभीर हो गया है। बलरामपुर कोतवाली थाना क्षेत्र के सरनाडीह गांव में कथित झोलाछाप के इलाज के बाद तीन साल के मासूम की मौत का मामला सामने आया है। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा है। वहीं परिजन इलाज करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

मृतक बच्चे की पहचान ग्राम जमुआटांड़ निवासी अभीस चेरवा के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, अभीस को बुखार था। इसके बाद उसे इलाज के लिए सरनाडीह गांव में भूलेश्वर सिंह के पास ले जाया गया। बताया जाता है कि वहां मरीजों का इलाज किया जाता है। बुखार के इलाज के दौरान बच्चे को इंजेक्शन लगाया गया, जिसके बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। बाद में बच्चे की मौत हो गई।

घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से सक्रिय कथित झोलाछाप चिकित्सकों की कार्यप्रणाली को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण इलाकों में कई ऐसे लोग इलाज करते नजर आते हैं, जिनकी चिकित्सकीय योग्यता और डिग्री को लेकर सवाल उठते रहे हैं। सामान्य बीमारी से लेकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं तक का इलाज किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई बार मरीजों की हालत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाया जाता है, लेकिन तब तक देर हो चुकी होती है।

रामानुजगंज समेत ग्रामीण इलाकों तक नेटवर्क

कथित झोलाछापों की मौजूदगी केवल बलरामपुर क्षेत्र तक सीमित होने की बात नहीं कही जा सकती। रामानुजगंज और आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी ऐसे लोगों के इलाज करने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की सीमित उपलब्धता का फायदा उठाकर कुछ लोग खुद को अनुभवी डॉक्टर बताकर मरीजों का उपचार करने लगते हैं।

बुखार, सर्दी-जुकाम जैसी सामान्य बीमारियों से लेकर इंजेक्शन और अन्य उपचार तक किए जाने की शिकायतें सामने आती हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि मरीज और उनके परिजन कई बार इन लोगों की वास्तविक चिकित्सकीय योग्यता की जांच किए बिना ही इलाज शुरू करा देते हैं।

पुलिस ने दर्ज किया मर्ग, पोस्टमार्टम कराया

बलरामपुर कोतवाली प्रभारी भापेंद्र साहू ने बताया कि, बुधवार रात्रि में सरनाडीह से सूचना आई है कि तीन साल के उमर के बच्चे को एक चिकित्सा व्यवसाई है जो झोलाछाप डॉक्टर के रूप में अवैध रूप से प्रैक्टिस करता है। अवैध रूप से लोगों का इलाज करता है। इसके द्वारा बच्चे का इलाज करवाया गया और इलाज के बाद बच्चे की मौत हो गई है। सूचना के बाद आज मर्ग कायम कर बच्चे का पोस्टमार्टम कराया गया है। रिपोर्ट में जो भी तथ्य आता है उसके आधार पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के तथ्यों के सामने आने का इंतजार है। इसके बाद ही बच्चे की मौत के वास्तविक कारण और इलाज से उसके संबंध को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि ग्रामीण इलाकों में बिना पर्याप्त चिकित्सकीय योग्यता के इलाज करने वालों पर प्रभावी रोक कब लगेगी और अगला मासूम इनकी कथित लापरवाही का शिकार बनने से कैसे बचेगा।

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