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हिसार : न्यूरोसाइंस से पार्किंसन तक, विद्यार्थियों ने जानी आधुनिक शोध की संभावनाएं

बीमारी के उपचार और आधुनिक शोध की संभावनाओं तक की जानकारी दी गई।

विशेषज्ञ वक्ता डॉ. शिखा मोंगा ने साेमवार काे विद्यार्थियों को न्यूरोसाइंस के व्यापक

क्षेत्र से परिचित करवाते हुए बताया कि यह मानव मस्तिष्क, तंत्रिका तंत्र और न्यूरॉन्स

की संरचना एवं कार्यप्रणाली का वैज्ञानिक अध्ययन है। उन्होंने कहा कि न्यूरोसाइंस का

दायरा केवल जीव विज्ञान और चिकित्सा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध मनोविज्ञान,

बायोटेक्नोलॉजी, कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों से भी है।

पार्किंसन के उपचार में नई तकनीकों से उम्मीद

सत्र के दौरान पार्किंसन रोग पर विशेष चर्चा हुई। डॉ. मोंगा ने इसे तंत्रिका

तंत्र से जुड़ी जटिल न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी बताते हुए अपने शोध कार्य के संदर्भ

में इसके उपचार की संभावनाओं पर विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने बताया कि आधुनिक

बायोटेक्नोलॉजी और न्यूरोसाइंस का संयोजन भविष्य में पार्किंसन जैसी जटिल बीमारियों

के बेहतर उपचार और प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वैज्ञानिक

आणविक जीव विज्ञान, जीन आधारित अध्ययन, स्टेम सेल तकनीक, ड्रग डिलीवरी सिस्टम, बायोइन्फॉर्मेटिक्स

और उन्नत इमेजिंग तकनीकों की मदद से इन बीमारियों की जैविक प्रक्रियाओं को समझने और

नए उपचार विकल्प विकसित करने में जुटे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को शोध के प्रति

जिज्ञासु बनने और विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों के बीच तालमेल को समझने के लिए प्रेरित

किया।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में डॉ. रामेश्वर ने विद्यार्थियों को राष्ट्रीय सेवा

योजना (एनएसएस) की जानकारी दी। उन्होंने एनएसएस के उद्देश्यों, सामाजिक सेवा में इसकी

भूमिका और समाज के प्रति युवाओं की जिम्मेदारियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने

विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़ने का आह्वान किया।

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