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हाई कोर्ट ने जेपी नड्डा के आवास पर जलता पुतला फेंकने वालों को राहत देने से किया इनकार

नई दिल्ली, 19 मई । दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2022 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के आवास पर पुतला जलाने और फेंकने के नौ आरोपितों के खिलाफ हत्या की कोशिश के मामले में चल रही कार्यवाही को निरस्त करने से इनकार कर दिया है। जस्टिस गिरीश कथपलिया की बेंच ने कहा कि इसे लोकतांत्रिक प्रदर्शन नहीं कहा जा सकता है, ये एक तोड़फोड़ की कार्रवाई थी।

कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक रोड पर पुतला जलाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने फुटपाथ पार किया और नड्डा के मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित आवास के सिक्योरिटी रुम की छत और गेट पर फेंक दिया। कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शन लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन प्रदर्शन के नाम पर हिंसा को कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे काम कर भाग जाना प्रदर्शन नहीं हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि ये चिंता की बात है कि समाज का एक हिस्सा प्रदर्शन के नाम पर ऐसी तोड़फोड़ की कार्रवाईयों में हिस्सा ले रहा है।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक 21 जून, 2022 को जेपी नड्डा के आवास पर नारे लगाते हुए पुतले को जलाया गया और उस पुतले को सिक्योरिटी रुम के पास फेंक दिया गया। उसके बाद इस घटना को अंजाम देने वाले लोग वहां से फरार हो गए। ये घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ, उसके बावजूद एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की धारा 307 यानि हत्या की कोशिश लगाई गई। उन्होंने कहा कि इस मामले में ज्यादा से ज्यादा भारतीय दंड संहिता की धारा 285 लगाई जा सकती थी। इसके पहले आरोपितों ने ट्रायल कोर्ट में बरी करने की मांग की थी, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने उनकी अर्जी खारिज कर दी थी, जिसके बाद याचिकाकर्ताओं ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

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