प्रधानमंत्री के आह्वान पर विपक्षी दलों की आलोचना को भाजपा ने बताया भ्रम फैलाने का प्रयास
और 140 करोड़ देशवासी प्रधानमंत्री के साथ खड़े हैं और प्रतिबद्ध हैं कि देश के लिए उनसे जो बन पड़ेगा, वो करेंगे। प्रधानमंत्री की ये अपील पूरी तरह से स्वैच्छिक और एहतियाती है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह पहली बार नहीं है कि किसी प्रधानमंत्री ने एहतियात के तौर पर देश से अपील की हो। इससे पहले लाल बहादुर शास्त्री, जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी ने भी ऐसी एहतियाती अपील की थीं। तब कांग्रेस ने उनकी सराहना की लेकिन जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ऐसा करते हैं तो सरकार को विफल बताती है। लोग विपक्ष की इस राष्ट्रविरोधी राजनीति को नकार रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम ने 13 जून 2013 को भारत के लोगों से सोना न खरीदने का आग्रह किया था। उस समय कोई युद्ध नहीं चल रहा था। यह सच है कि कांग्रेस शासनकाल में ही भारत की आर्थिक व्यवस्था को ‘कमजोर पांच’ श्रेणी में रखा गया था। आज वे दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था पर उंगली उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री
अपील करते हैं, तो विपक्षी पार्टियों को चाहिए कि वो भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहें।
लेकिन वो कहते हैं कि ये भारत की विफलता दर्शाता है।
ये कैसे दोहरे मापदंड हैं। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है।
लेकिन देश की जनता पूरी तरह से ऐसी नकारात्मक देशविरोधी राजनीति को नकार रही है। गौरव भाटिया ने कहा कि जबसे युद्ध की शुरुआत हुई है चीन में पेट्रोल 23 प्रतिशत महंगा हुआ है, अमेरिका में 45 प्रतिशत, कनाडा में 30 प्रतिशत और ऑस्ट्रेलिया में 30 प्रतिशत महंगा हुआ है।
जबकि भारत में शून्य प्रतिशत महंगा हुआ है।
ये है भारत की ताकत, ये है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नेतृत्व, जो कह रहा है कि वे आम आदमी पर आंच नहीं आने देंगे।
उन्होंने कहा कि भारत के हर नागरिक ने प्रण लिया है कि वे इन 7 अपील का पालन करेंगे।
लेकिन, देश के लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी हैं तो भारत के, लेकिन हर 15 दिनों में विदेश यात्रा पर चले जाते हैं, उन्हें इससे बहुत दिक्कत है।
भारत में किसी भी आवश्यक वस्तु की कोई भी कमी नहीं है।
विपक्ष को चाहिए कि वो पैनिक न फैलाए, भ्रम की राजनीति न करे और आपदा में अवसर की खोज न करे।