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ओरण क्षेत्र में पेड़ों की कटाई पर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक

जोधपुर, 26 अपै्रल । राजस्थान हाईकोर्ट ने जैसलमेर जिले के फतेहगढ़ क्षेत्र स्थित बईया गांव में प्रस्तावित सौर ऊर्जा परियोजना के तहत पेड़ों की कटाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। करीब 2587 बीघा भूमि पर हो रही कटाई प्रक्रिया को लेकर अदालत ने गंभीर रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट आने तक एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा।

न्यायाधीश डॉ। पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायाधीश संदीप शाह की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए विशेषज्ञ समिति का गठन किया। समिति को मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आंकलन करने के निर्देश दिए। अदालत ने समिति को 20 मई 2026 तक अपनी रिपोर्ट पेश करने को कहा, तब तक यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए। मामले में राज्य सरकार ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि संबंधित खसरा नंबर 386 की भूमि वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड में ओरण श्रेणी में दर्ज नहीं है। सरकार का तर्क है कि इसी आधार पर सौर ऊर्जा परियोजना की प्रक्रिया नियमों के अनुसार आगे बढ़ाई जा रही है। इसमें कोई अनियमितता नहीं है। निजी सौर ऊर्जा कंपनी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि परियोजना भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। कंपनी ने दावा किया कि वह वनीकरण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी सभी आवश्यक शर्तों का पालन कर रही है। परियोजना पर्यावरण के अनुकूल तरीके से संचालित की जाएगी।

याचिकाकर्ताओं का दावा- खतरे में हजारों पेड़ों का अस्तित्व

याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर पक्ष में कहा गया कि यह भूमि ऐतिहासिक रूप से रोहिड़ालराय मंदिर ओरण के नाम से जानी जाती रही है। यहां खेजड़ी, जाल, रोहिड़ा सहित सेवण घास के साथ लगभग 6500 छोटे-बड़े पेड़ मौजूद हैं। साथ ही मां देढ़सर तालाब क्षेत्र के वन्यजीवों और मवेशियों के लिए जल का प्रमुख स्रोत है, जिसे संरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। सुनवाई के बाद अदालत ने स्पष्ट किया है कि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट आने और अगले आदेश जारी तक संबंधित भूमि पर किसी भी प्रकार की पेड़ कटाई नहीं की जा सकेगी। विशेषज्ञों की कमेटी खसरा नंबर 386 की जमीनी हकीकत देखेगी। कमेटी को अपनी रिपोर्ट 20 मई 2026 तक कोर्ट में पेश करनी होगी।

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