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कागजों में सिमटा बचपन: पन्ना में बाल श्रम पर बेअसर कानून, जिम्मेदार बेपरवाह

पन्ना, 11 अप्रैल । बाल श्रम पर रोक लगाने के लिए देश में सख्त कानून और कई योजनाएं लागू हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में इनका असर जमीनी स्तर पर नजर नहीं आ रहा। हालात यह हैं कि गरीब परिवारों के बच्चों का भविष्य कागजों तक सीमित होकर रह गया है, जबकि श्रम विभाग की सक्रियता सवालों के घेरे में है।

जिले में जगह-जगह नाबालिग बच्चे मजदूरी करते दिखाई दे रहे हैं। शासकीय और निजी निर्माण कार्यों में फावड़ा चलाते, होटलों में बर्तन धोते, झाड़ू लगाते या कबाड़ बीनते नौनिहाल आम दृश्य बन चुके हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागीय अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं और वास्तविक धरातल पर कोई ठोस कदम नजर नहीं आता।

ऊंचाई छूने के सपने अधूरे

हर बच्चे का सपना होता है कि वह पढ़-लिखकर अपने जीवन में आगे बढ़े, लेकिन बाल श्रम की बेड़ियों में जकड़े ये बच्चे अपने सपनों को साकार नहीं कर पा रहे। गरीबी और सामाजिक परिस्थितियों के कारण कई बच्चे पढ़ाई से दूर हो रहे हैं, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। कुछ बच्चे गलत संगत या नशे की ओर भी बढ़ रहे हैं।

मूकदर्शक बना श्रम विभाग

जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण अंचलों तक नाबालिगों से मजदूरी कराई जा रही है, लेकिन श्रम विभाग की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आ रही। विभागीय अधिकारी कार्यालयों में बैठकर आंकड़े तैयार करने तक सीमित हैं, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।

स्थिति यह है कि जिले में बाल श्रमिकों की संख्या लगातार बढ़ती दिख रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर गंभीर नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब कानून मौजूद हैं, तो उनका पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आखिर कौन निभाएगा।

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