हिमाचल के सरकारी स्कूलों में ‘सीबीएसई’ पैटर्न के लिए 9,828 शिक्षकों ने दी परीक्षा
धर्मशाला, 22 मार्च । हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों को सीबीएसई पैटर्न पर ढालने की दिशा में सुक्खू सरकार ने एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहले से कार्यरत शिक्षकों को अब सीबीएसई के तहत संचालित होने वाले विशेष स्कूलों में तैनात करने के लिए एक विशेष चयन प्रक्रिया शुरू की गई है। इसी कड़ी में हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित योग्यता परीक्षा में प्रदेश के हजारों शिक्षकों ने अपनी प्रतिभा और विषय ज्ञान का प्रदर्शन किया।
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने इस परीक्षा की आधिकारिक उपस्थिति रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि प्रदेश के 24 केंद्रों पर कुल 9,828 शिक्षकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। यह परीक्षा केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उन शिक्षकों के लिए एक सुनहरा अवसर है जो भविष्य में सीबीएसई मानकों के अनुरूप शिक्षा प्रदान करने की बड़ी जिम्मेदारी संभालना चाहते हैं।
हिमाचल सरकार की नई नीति के अनुसार, इस परीक्षा में सफल होने वाले शिक्षकों का चयन पूरी तरह से मेरिट के आधार पर किया जाएगा। चयनित होने वाले इन गुरुजनों को प्रदेश के नव-निर्धारित सीबीएसई स्कूलों में अगले 10 वर्षों के लिए नियुक्त किया जाएगा।
बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने इस संबंध में कहा कि यह परीक्षा शिक्षकों की गुणवत्ता और सीबीएसई प्रणाली के प्रति उनकी तत्परता को जांचने का एक महत्वपूर्ण पैमाना है। बोर्ड बेहद पारदर्शी तरीके से मेरिट सूची तैयार कर रहा है ताकि केवल सर्वश्रेष्ठ और योग्य शिक्षक ही इन विशेष स्कूलों का नेतृत्व कर सकें और सरकारी शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकें।
परीक्षा के आंकड़ों का जिलावार विश्लेषण करें तो कांगड़ा, शिमला और मंडी जिलों में शिक्षकों की सबसे अधिक भागीदारी देखने को मिली है। कांगड़ा जिले में इस चयन प्रक्रिया को लेकर विशेष उत्साह देखा गया, जहां अकेले एमसीएम डीएवी कॉलेज, कांगड़ा केंद्र पर सबसे अधिक 886 शिक्षक अपनी उपस्थिति दर्ज कराने पंहुचे। इसके साथ ही धर्मशाला गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज में 452 और पालमपुर के शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा कॉलेज में 451 शिक्षकों ने मेरिट में स्थान बनाने के लिए पसीना बहाया। शिमला जिले में भी गुरुजनों का भारी हुजूम उमड़ा, जहां सेंट बीड्स कॉलेज में 829, राजकीय कन्या महाविद्यालय में 727 और पोर्टमोर स्कूल में 341 शिक्षक परीक्षा में शामिल हुए। मंडी जिले के केंद्रों पर भी कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जहाँ वल्लभ कॉलेज में 471 और जोगिंदरनगर कॉलेज में 410 शिक्षक परीक्षा देने पहुँचे।
प्रमुख केंद्रों की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, हमीरपुर जिले के अनु स्थित नेताजी सुभाष चंद्र मेमोरियल पीजी कॉलेज में 533 और नाहन के डॉ. वाई.एस. परमार पीजी कॉलेज में 658 शिक्षकों ने अपनी दावेदारी पेश की। सिरमौर और सोलन जैसे क्षेत्रों में भी शिक्षकों की उपस्थिति काफी प्रभावी रही, जहां नालागढ़ डिग्री कॉलेज में 397 और सोलन कॉलेज में 213 शिक्षकों ने परीक्षा दी। बिलासपुर जिले के स्वामी विवेकानंद कॉलेज घुमारवीं में 303 और झंडूता कॉलेज में 202 शिक्षकों ने अनुशासन के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। डॉ. राजेश शर्मा द्वारा साझा की गई इस रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश भर के 24 केंद्रों पर कुल 11,294 शिक्षकों को आमंत्रित किया गया था, जिनमें से लगभग 87 प्रतिशत शिक्षकों ने इस महा-परीक्षा में हिस्सा लिया। अब सबकी नज़रें बोर्ड द्वारा तैयार की जाने वाली मेरिट सूची पर टिकी हैं, जो इन शिक्षकों के अगले 10 साल का कार्यक्षेत्र तय करेगी।