बिना वैध अनुमति फोन रिकॉर्ड करना अवैध, नगर निगम के पूर्व वित्तीय सलाहकार के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द
जयपुर, 19 मार्च । राजस्थान उच्च न्यायालय ने नगर निगम में ठेकेदारों के बिल पास करने की एवज में कथित रूप से कमीशन लेने से जुडे मामले में तत्कालीन वित्तीय सलाहकार अचलेश्वर मीणा के खिलाफ एसीबी में दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है। वहीं इस आधार पर अदालत में पेश आरोप पत्र व उससे जुडी समस्त कार्रवाई को भी अदालत ने निरस्त कर दिया है। जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली की एकलपीठ ने यह आदेश अचलेश्वर मीणा की आपराधिक याचिका को स्वीकार करते हुए दिए। अदालत ने माना की बिना एफआईआर दर्ज किए किसी व्यक्ति के घर में प्रवेश कर तलाशी लेना और उसे गिरफ्तार करना संविधान के प्रावधानों के खिलाफ है। इसके साथ ही अदालत ने माना की मामले में फोन टैप करने की वैध अनुमति नहीं ली गई और इसमें तय प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। ऐसे में इसे अवैध मानते हुए साक्ष्य के रूप में शामिल नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की निजी बातचीत को बिना वैध प्रक्रिया के रिकॉर्ड करना उसके मौलिक अधिकारों की अवहेलना है।
याचिका में अधिवक्ता सुधीर गुप्ता ने कहा कि मामले में एसीबी की ओर से की गई पूरी कार्रवाई ही अवैध है। मामले में बिना एफआईआर दर्ज किए याचिकाकर्ता के घर की तलाशी ली गई और बाद में उसे गिरफ्तार किया गया, जबकि एफआईआर बाद में दर्ज की गई। इसके साथ ही मामले में फोन रिकॉर्ड करने का आदेश विशेष गृह सचिव ने दिया, जबकि ये गृह सचिव के अधीनस्थ काम करते हैं और ऐसा आदेश देने के लिए सक्षम नहीं है। एसीबी ने लोक सुरक्षा का हवाला देकर रिकॉर्डिंग की अनुमति मांगी थी, लेकिन अनुमति देते समय लोक सुरक्षा की स्थिति को नहीं देखा गया। याचिका में यह भी कहा गया कि उससे रिश्वत राशि बरामद नहीं हुई है। एसीबी ने सिर्फ कॉल रिकॉर्ड के आधार पर उसे आरोपी बनाया है। ऐसे में उसकी खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द किया जाए। जिसका विरोध करते हुए एसीबी की ओर से कहा गया कि निगम में बिल पास करने की एवज में 2 से 3 फीसदी कमीशन लेने की विश्वसनीय सूचना मिली थी। याचिकाकर्ता और अन्य आरोपितों के बीच हुई बातचीत में रिश्वत के संकेत मिले थे। इसके आधार पर कार्रवाई की गई थी। वहीं सह आरोपित से करीब 27 लाख रुपये बरामद हुए थे। यह केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि संगठित अपराध का मामला है। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज एफआईआर और उसके आधार पर अन्य कानूनी कार्रवाई को रद्द कर दिया है। गौरतलब है कि एसीबी ने मामले में 8 जनवरी, 2022 को एफआईआर दर्ज की थी। इससे एक दिन पहले एसीबी ने याचिकाकर्ता को गिरफ्तार किया था।