हिसार : हरियाणा विधानसभा की तर्ज पर पूर्णत: पेपरलेस होगी हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल
। हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल को जल्द ही पूरी तरह पेपरलेस बनाया जाएगा।
इसके लिए काउंसिल ने डिजिटलीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है और इसे हरियाणा विधानसभा
की तर्ज पर पूर्णत: पेपरलेस करने की योजना पर काम चल रहा है। इससे काउंसिल के कामकाज
में तेजी आएगी और रिकॉर्ड को सुरक्षित व पारदर्शी तरीके से संभाला जा सकेगा।
काउंसिल के चेयरमैन
बीबी सिंगल व इग्जेक्युटिव कमेटी सदस्य रविन्द्र चोपड़ा ने शनिवार काे बताया कि हरियाणा राज्य
फार्मेसी काउंसिल में अब तक लगभग 70 हजार फार्मासिस्ट पंजीकृत हो चुके हैं। इतने बड़े
स्तर पर रिकॉर्ड और दस्तावेजों को व्यवस्थित रखने के लिए पूरे सिस्टम को डिजिटल बनाया
जा रहा है। इसके लिए एक एजेंसी भी नियुक्त कर ली गई है, जो पुराने रिकॉर्ड और फाइलों
को स्कैन करके सर्वर पर अपलोड करने का काम कर रही है। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था
लागू होने के बाद काउंसिल की सभी फाइलें डिजिटल माध्यम से संचालित होंगी। कोई भी फाइल
रजिस्ट्रेशन के लिए आएगी वह सबसे पहले रिसेप्शन पर ली जाएगी। वहीं पर सभी दस्तावेज
स्कैन करके सिस्टम अपलोड हो जाएंगे और उसके बाद आगे कर्मचारी उसे प्रोसेस करेंगे। सभी
दस्तावेज जांचने के बाद उनकी रजिस्ट्रेशन को संबंधित अधिकारी द्वारा कर दिया जाएगा।
उसके बाद रजिस्ट्रार के पास डिजिटल रिकार्ड के रूप में सुरक्षित रखी जाएगी। आवश्यकता
पड़ने पर किसी भी फाइल को सिस्टम से तुरंत निकाला जा सकेगा। इससे कागजी फाइलों पर निर्भरता
कम होगी और कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी बनेगी।
पदाधिकारियों ने
बताया कि काउंसिल ने फार्मासिस्टों के पंजीकरण की प्रक्रिया को भी आधुनिक बनाने के
लिए नया वेब पोर्टल लॉन्च कर दिया है। इस पोर्टल के माध्यम से अब फार्मासिस्ट ऑनलाइन
आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने के बाद आवेदकों को समय-समय पर उनके आवेदन की स्थिति
के बारे में मैसेज के माध्यम से जानकारी दी जाती है। रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद
प्रमाणपत्र को ऑनलाइन अपलोड कर दिया जाता है, उस सर्टिफिकेट पर लगे क्यूआर कोड के माध्यम
उसकी सत्यता को प्रमाणित किया जा सकेगा। इसके साथ ही आवेदकों को प्रमाणपत्र की फिजिकल
कॉपी भी भेजी जा रही है।
चेयरमैन ने बताया
कि काउंसिल भविष्य में फार्मासिस्टों के लिए एक विशेष जॉब पोर्टल भी शुरू करने की योजना
बना रही है। इस पोर्टल के माध्यम से नौकरी देने वाले संस्थान और नौकरी तलाश रहे फार्मासिस्ट
एक ही प्लेटफार्म पर जुड़ सकेंगे। इससे फार्मासिस्टों को रोजगार के अवसर ढूंढने में
आसानी होगी और संस्थानों को भी योग्य उम्मीदवार मिलने में सुविधा मिलेगी।
रविन्द्र चोपड़ा
ने बताया कि काउंसिल ने पुराने लंबित मामलों को निपटाने की दिशा में भी तेजी से काम
किया है। अधिकांश पुरानी पेंडेंसी को खत्म कर दिया गया है और लंबित फाइलों का निस्तारण
किया जा चुका है। काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि जिन आवेदकों के दस्तावेज अधूरे हैं,
उन्हें एक महीने का समय दिया जाएगा। लगभग 2000 आवेदक ऐसे हैं, जिनके रजिस्ट्रेशन के
दस्तावेज अधूरे हैं। उनके फार्म नंबर वेबपोर्टल पर अपलोड कर देंगे और जो आवेदक एक महीने
के अंदर दस्तावेज को जमा करवा देंगे, उन्हें प्रोसेस कर देंगे, अन्यथा निर्धारित समय
के बाद ऐसे मामलों को रद्द भी किया जा सकता है।
बीबी सिंगल के अनुसार,
पेपरलेस व्यवस्था लागू होने से न केवल प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी बल्कि पारदर्शिता
भी बढ़ेगी और फार्मासिस्टों को अपनी सेवाओं से जुड़ी सुविधाएं ऑनलाइन ही उपलब्ध हो
सकेंगी। साथ ही रिकॉर्ड के सुरक्षित डिजिटल संरक्षण से भविष्य में किसी भी जानकारी
को ढूंढना और सत्यापित करना भी पहले की तुलना में अधिक आसान हो जाएगा।