News Chetna

सच की ताजगी, आपकी अपेक्षा

Himachal Pradesh

विजिलेंस को आरटीआई से बाहर करना गलत, पारदर्शिता से डर रही सरकार : जयराम ठाकुर

धर्मशाला, 14 मार्च । कांगड़ा प्रवास पर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि सुक्खू सरकार द्वारा विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो को सूचना के अधिकार के दायरे से बाहर करने का निर्णय अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, अलोकतांत्रिक और संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। धर्मशाला में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि जिस पार्टी के नेता पूरे देश में संविधान की किताब लेकर चल रहे हैं वही पार्टी सत्ता में आने के बाद संविधान, कायदा-कानून और लोकलाज की धज्जियां उड़ा रही है। सुक्खू सरकार के इस फैसले हसे यह साफ़ है कि वह पारदर्शिता से डरती है और प्रदेश में फैलते भ्रष्टाचार को छिपाने का प्रयास कर रही है। उससे भी हैरानी की बात यह है कि व्यवस्था परिवर्तन वाली सुख की सरकार अपने ही आलाकमान द्वारा बनाए गए कानून के ख़िलाफ़ खड़ी है।

जयराम ठाकुर ने कहा कि सूचना का अधिकार कानून की धारा 24 स्पष्ट रूप से कहती है कि केवल वे एजेंसियां इस कानून से बाहर हो सकती हैं जो इंटेलिजेंस और सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील गतिविधियों में संलग्न हों। यदि उनमें भी भ्रष्टाचार और मानवाधिकार हनन की शिकायत हो तो उसकी जानकारी देनी पड़ेगी। जबकि विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो का काम ही भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करना है। ऐसे में इसे आरटीआई के दायरे से बाहर करने का कोई संवैधानिक या नैतिक आधार नहीं है। राज्यों की विधान सभा और संसद भी भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को आरटीआई से बाहर रखने का क़ानून नहीं बना सकते हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सबसे हैरानी की बात यह है कि ऐसा बड़ा निर्णय बिना विधानसभा में लाए और बिना विधायी प्रक्रिया पूरी किए लेने की कोशिश की जा रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर विजिलेंस में ऐसी कौन सी जांच चल रही है, जिसे प्रदेश की जनता से छिपाने की जरूरत महसूस हो रही है। जिस जांच का उद्देश्य भ्रष्टाचार को उजागर करना और दोषियों को सजा दिलाना है, उसे गोपनीय बनाने का क्या औचित्य है? इससे साफ़ संकेत मिलता है कि सरकार अपने ही मंत्रियों और नेताओं से जुड़े मामलों को दबाने की तैयारी कर रही है। हाल ही में एक “अत्यंत वरिष्ठ मंत्री” के खिलाफ मुख्यमंत्री द्वारा विजिलेंस जांच का आदेश दिया जो मामला कांग्रेस के आलाकमान तक गया। इस घटनाक्रम ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि सरकार के भीतर किस प्रकार के दबाव और खींचतान चल रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि मुख्यमंत्री विजिलेंस की जांच को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर अपने मंत्रियों और विधायकों पर नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं।

Leave a Reply