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कैथल में एंटी करप्शन ब्यूरो की बड़ी कार्रवाई: पब्लिक हेल्थ के डिप्टी सुपरिटेंडेंट सहित तीन कर्मचारी 30 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार

कैथल, 20 फ़रवरी । जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (विजिलेंस) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जनस्वास्थ्य विभाग (पब्लिक हेल्थ) के डिप्टी सुपरिटेंडेंट सहित तीन कर्मचारियों को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोप है कि करीब 35 लाख रुपये के लंबित बिल पास करने के एवज में यह रिश्वत मांगी गई थी।गांव क्योड़क निवासी हाल निवासी कैथल विशाल ने एंटी करप्शन ब्यूरो को शिकायत दी थी कि उसने जनस्वास्थ्य विभाग में पेंट, लीकेज ठीक करने सहित कई काम किए थे, लेकिन इन कार्यों के बिल कई वर्षों से लंबित पड़े हैं। विशाल का आरोप है कि उसके वर्ष 2016 के किए गए काम के दस्तावेज भी उनके पास पड़े हैं। उनकाे लीक करके ब्लैकमेल करते आ रहे हैं। जब भी वह अपने बिल पास कराने के लिए विभाग के डिप्टी सुपरिटेंडेंट कमल कांत के पास जाता था तो उससे पैसों की मांग की जाती थी। उसे ब्लैकमेल करने में कलायत का एक आरटीआई कार्यकर्ता भी शामिल है। इसके अधिकारियाें की मिलीभगत है। लगातार हो रही मांग और बिलों के लटकने से परेशान होकर उसने इसकी शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो में कर दी।शिकायत के आधार पर एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने जाल बिछाया। योजना के तहत शुक्रवार को विशाल को 30 हजार रुपये लेकर जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यालय भेजा गया। तय योजना के अनुसार विशाल ने डिप्टी सुपरिटेंडेंट कमल कांत को 20 हजार रुपये तथा हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) के तहत लगे ड्राफ्ट्समैन अशोक को पांच-पांच हजार रुपये दिए। अशाेक ने कंप्यूटर आपरेटर बलजीत के नाम से पैसे लिए। जैसे ही आरोपियों ने रिश्वत की राशि ली, पहले से सतर्क एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने मौके पर दबिश देकर तीनों को पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद विभाग में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि पकड़े जाने के बाद डिप्टी सुपरिटेंडेंट कमल कांत भावुक हो गए और खुद को गलत तरीके से फंसाए जाने की बात कहते नजर आए।कैथल एंटी करप्शन ब्यूराे के इंस्पेक्टर सूबे सिंह सैनी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बिल पास कराने के एवज में यह रिश्वत मांगी गई थी। शिकायत से संबंधित कागज डिप्टी सुपरिटेंडेंट से बरामद हुए हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो ने तीनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। साथ ही यह भी खंगाला जा रहा है कि कहीं इस मामले में अन्य कर्मचारी या अधिकारी भी शामिल तो नहीं हैं। इस कार्रवाई के बाद विभागीय कर्मचारियों में खलबली मची हुई है।

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