राजस्थान में शिक्षा का बदला परिदृश्य: ड्रॉपआउट दर घटी, संक्रमण दर में सुधार; बजट 2026-27 में बड़े प्रावधान
जयपुर, 15 फ़रवरी । मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान में शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिल रहा है। राज्य की आर्थिक समीक्षा 2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि जहां एक ओर ड्रॉपआउट दर में कमी आई है, वहीं विभिन्न स्तरों पर संक्रमण दर में भी सुधार हुआ है। साथ ही बजट 2026-27 में गुणवत्तापूर्ण, रोजगारपरक और नवाचार आधारित शिक्षा के लिए बड़े प्रावधान किए गए हैं।
आर्थिक समीक्षा के अनुसार माध्यमिक से उच्च माध्यमिक स्तर पर संक्रमण दर वर्ष 2023-24 के 82.6 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 88.2 प्रतिशत हो गई है। वहीं प्राथमिक से उच्च प्राथमिक स्तर पर यह दर 90.7 प्रतिशत से बढ़कर 93.8 प्रतिशत पहुंच गई। ड्रॉपआउट दर में भी उल्लेखनीय कमी आई है। प्राथमिक स्तर पर यह 7.6 प्रतिशत से घटकर 3.6 प्रतिशत, उच्च प्राथमिक स्तर पर 6.8 प्रतिशत से घटकर 3.6 प्रतिशत तथा माध्यमिक स्तर पर 11.1 प्रतिशत से घटकर 7.7 प्रतिशत रह गई है।
बजट वर्ष 2026-27 में प्रारंभिक शिक्षा के लिए 21,646 करोड़ रुपये से अधिक तथा माध्यमिक शिक्षा के लिए 19,473 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत समग्र शिक्षा अभियान के तहत प्रारंभिक शिक्षा में 13,767 करोड़ रुपये से अधिक तथा माध्यमिक शिक्षा में 2,821 करोड़ रुपये से अधिक व्यय प्रस्तावित है।
इसके अलावा, आरटीई के अंतर्गत निजी विद्यालयों को शिक्षण शुल्क पुनर्भरण के लिए 1,250 करोड़ रुपये तथा पीएमश्री योजना के लिए 434 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है।
विद्यार्थियों को टेबलेट/लैपटॉप, साइकिल और यूनिफॉर्म वितरण योजनाओं को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए डीबीटी एवं ई-वाउचर प्रणाली लागू की जाएगी। कक्षा 8, 10 और 12 के चयनित मेधावी विद्यार्थियों को टेबलेट या लैपटॉप खरीदने के लिए 20 हजार रुपये तक की सहायता ई-वाउचर के माध्यम से दी जाएगी।
इसी प्रकार 9वीं कक्षा में प्रवेश लेने वाली जरूरतमंद छात्राओं को साइकिल के लिए ई-वाउचर दिया जाएगा। निःशुल्क साइकिल वितरण योजना के तहत लगभग 3.90 लाख बालिकाओं को लाभान्वित करने का लक्ष्य है। वहीं कक्षा 1 से 8 तक के 40 लाख से अधिक जरूरतमंद विद्यार्थियों को निःशुल्क यूनिफॉर्म के लिए 250 करोड़ रुपये डीबीटी के माध्यम से दिए जाएंगे।
निःशुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण योजना के तहत शैक्षिक सत्र 2025-26 में लगभग 80 लाख विद्यार्थियों को 4 करोड़ से अधिक पाठ्यपुस्तकों का वितरण किया गया। बजट 2026-27 में कक्षा 1 से 8 तक के लिए 150 करोड़ रुपये तथा माध्यमिक शिक्षा के लिए 90 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आगामी सत्र में 500 अतिरिक्त विद्यालयों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे, जिसके लिए 51 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान है। प्रत्येक जिले में ‘स्कूल टू वर्क’ कार्यक्रम, घुमंतू समुदायों के बच्चों के लिए ‘स्कूल ऑन व्हील्स’, जयपुर और जोधपुर में स्पेस गैलरी तथा एक हजार विद्यालयों में एआई आधारित पर्सनलाइज्ड लर्निंग लैब्स स्थापित करने की पहल की गई है।
इसके अलावा 400 विद्यालयों को चरणबद्ध तरीके से ‘सीएम राइज’ विद्यालयों में क्रमोन्नत करने के लिए 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। राज्य सरकार का मानना है कि इन पहलों से प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता, पहुंच और रोजगारपरकता को नई दिशा मिलेगी तथा भविष्य की जरूरतों के अनुरूप सक्षम मानव संसाधन तैयार होंगे।