पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि को भाजपा ने समर्पण दिवस के रूप में मनाया
रांची, 11 फरवरी । झारखंड में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि को ‘समर्पण दिवस’ के रूप में मनाया। प्रदेश के सभी जिलों में पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनकी प्रतिमा और चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी तथा उनके व्यक्तित्व और कृतित्व का स्मरण किया।
रांची स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद आदित्य साहू ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक महामानव थे, जिनका असमय निधन देश ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए अपूरणीय क्षति थी।
उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय ने गरीबी और अभाव को निकट से देखा था, इसलिए उन्होंने ‘अंत्योदय’ का मंत्र दिया, जिसका उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाना है।
आदित्य साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों और चिंतन का अनुसरण करते हुए देश की सेवा में जुटे हैं। केंद्र की मोदी सरकार गांव, गरीब, किसान, दलित, वंचित और पिछड़े वर्ग को विकास की मुख्यधारा में जोड़ने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने साहिबगंज में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि भाजपा का मूल चिंतन स्थापना काल से ही एकात्म मानववाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर आधारित है, जिसके प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय रहे।
मरांडी ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति ही उसकी एकात्मता का आधार है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारतीय चिंतन के मूल में एकता की भावना निहित है और इसी कारण भारत केवल एक भूभाग नहीं, बल्कि जीवंत सांस्कृतिक चेतना है।
रांची में आयोजित श्रद्धांजलि सभा के दौरान प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक कुशल संगठनकर्ता थे, जिन्होंने अपना जीवन मां भारती की सेवा में समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय ने भारत की राजनीतिक व्यवस्था को नई दिशा दी और आज भाजपा उनके आदर्शों पर चलकर विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनी है।
उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय के आदर्शों के अनुरूप भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए राजनीति सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा का मार्ग है।———