गुरुग्राम में शुरू हुआ सरस आजीविका मेला, दिखेगा लखपति दीदियों का हुनर
गुरुग्राम, 10 फरवरी । शहर में एक बार फिर से देश के विभिन्न राज्यों की ग्रामीण परंपराओं, लोक कलाओं और महिला उद्यमिता का महाकुंभ सरस आजीविका मेला-2026 शुरू हो गया है। यहां सेक्टर-29 स्थित लेजर वैली मैदान में लगा यह राष्ट्रीय स्तर का मेला 10 फरवरी से 26 फरवरी तक चलेगा। इस मेले में मिनी भारत की जीवंत झलक देखने को मिलेगी।
मेले को लेकर मंगलवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव स्वाति शर्मा ने स्वयं सहायता समूहों की प्रगति पर महत्वपूर्ण तथ्य सांझा किए। उन्होंने कहा कि इस वर्ष का सरस मेला अपने आप में ऐतिहासिक है। मेले में देश के 28 राज्यों से आईं 900 से अधिक महिला उद्यमी लखपति दीदी भाग ले रही है। ये विभिन्न स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। मेला परिसर में 450 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जहां उत्तर में कश्मीर के पश्मीना से लेकर दक्षिण में तमिलनाडु के सिल्क तक और पश्चिम में राजस्थान की कढ़ाई से लेकर पूर्व में असम के बांस शिल्प तक, सब कुछ एक ही छत के नीचे उपलब्ध है।
इन दीदियों द्वारा बनाये गये प्रिमियम उत्पाद को अब ई-सरस एप से भी खरीदा जा सकता है। स्वाति शर्मा ने बताया कि दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत वर्तमान में देश की 10 करोड़ से ज्यादा महिलाएं संगठित हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीन करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य दिया गया था, जिसमें से दिसंबर 2025 तक 2.9 करोड़ दीदी लखपति बन चुकी हैं। आने वाले कुछ ही समय में इसे पूरा कर लिया जाएगा।
नॉलेज पवेलियन सिर्फ बाजार नहीं, कौशल विकास का केंद्र
इस बार सरस मेले का एक मुख्य आकर्षण नॉलेज एंड लर्निंग पवेलियन है। यहां केवल उत्पादों की बिक्री नहीं हो रही, बल्कि महिला उद्यमियों के लिए प्रतिदिन विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। इन सत्रों में महिलाओं को पैकेजिंग, ब्रांडिंग, बिजनेस प्रपोजल तैयार करने और सोशल मीडिया मार्केटिंग के गुर सिखाए जा रहे हैं। मेले में आने वाले दर्शकों के लिए डेमो एवं लाइव लर्निंग एरिया एक विशेष अनुभव साबित हो रहा है। यहां लोग केवल सामान खरीद ही नहीं रहे, बल्कि उन्हें बनते हुए भी देख रहे हैं। मिट्टी के बर्तनों को चाक पर आकार देते कुशल शिल्पकार बच्चों और युवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। वहीं पारंपरिक सुई-धागे और शीशों के काम से कपड़े पर उकेरी जाने वाली कला का सीधा प्रदर्शन किया जा रहा है। प्राकृतिक रेशों और बांस से बनाई जाने वाली ईको-फ्रेंडली टोकरियों और घरेलू सामानों का लाइव डेमो सतत जीवन शैली की प्रेरणा दे रहा है।