राजस्थान की धरती आयुर्वेद की सशक्त आधारशिला, इसके संवर्धन को सरकार दे रही प्राथमिकता : मुख्यमंत्री
जयपुर, 09 फ़रवरी । मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान की मिट्टी में आयुर्वेद की जड़ें गहराई तक समाई हुई हैं। प्रदेश की पहाड़ियां, वन क्षेत्र और यहां उपलब्ध औषधीय पौधे इस बात के साक्षी हैं कि राजस्थान सदियों से आयुर्वेद का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। राज्य सरकार आयुर्वेद के संवर्धन, विस्तार और जनमानस में इसके व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्राथमिकता के साथ कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री शर्मा सोमवार को जयपुर स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए) के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1976 में एक आयुर्वेद महाविद्यालय के रूप में प्रारंभ हुआ राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान आज देश के प्रमुख ‘डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ के रूप में स्थापित हो चुका है। राजस्थान की धरती पर स्थित इस संस्थान ने बीते 50 वर्षों में शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान और रोगी सेवा के क्षेत्र में राष्ट्रीय नेतृत्व स्थापित किया है, जो प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाने में आयुर्वेद और योग की अहम भूमिका रही है। आयुर्वेद के माध्यम से ऋषि-मुनियों ने यह ज्ञान दिया कि किस ऋतु और माह में कौन-सी बीमारियां होती हैं और उनका उपचार कैसे संभव है। चरक, सुश्रुत और वाग्भट्ट जैसे महान आचार्यों ने आयुर्वेद को व्यवस्थित और वैज्ञानिक आधार प्रदान किया। चरक संहिता में ‘स्वस्थ शरीर धर्म का प्रथम साधन’ बताया गया है, वहीं सुश्रुत को आज पूरा विश्व शल्य चिकित्सा का जनक मानता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सपना ‘भारत में उपचार और भारत द्वारा उपचार’ को साकार करना है। उनके नेतृत्व में अलग आयुष मंत्रालय की स्थापना से आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को नई ऊर्जा मिली। प्रधानमंत्री के प्रयासों से 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित हुआ, जिससे पूरी भारतीय चिकित्सा परंपरा को वैश्विक पहचान मिली। आयुर्वेद अनुसंधान में निवेश बढ़ा है और आयुर्वेद संस्थानों का निरंतर विस्तार किया गया है।
मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा नए आयुर्वेद चिकित्सालयों, महाविद्यालयों और डिस्पेंसरियों की स्थापना कर सुलभ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। स्नातक एवं स्नातकोत्तर सीटों में वृद्धि, आधुनिक प्रयोगशालाएं, ड्रग स्टैंडर्डाइजेशन यूनिट और शिक्षण फार्मेसी को सुदृढ़ किया गया है। आयुर्वेद अस्पतालों का विस्तार, पंचकर्म इकाइयों का सशक्तिकरण, दवाखानों का आधुनिकीकरण और शिक्षा-अनुसंधान के नए अवसर सृजित कर आयुर्वेद को जन-स्वास्थ्य की मुख्यधारा में आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने एनआईए के लिए जयपुर में भूमि आवंटन के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन भी दिया।
केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आयुष एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय प्रताप राव जाधव ने कहा कि राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की 50 वर्ष की यात्रा केवल समय की नहीं, बल्कि उन चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और कर्मयोगियों की तपस्या और समर्पण की कहानी है, जिन्होंने पीढ़ी दर पीढ़ी आयुर्वेद के दीपक को प्रज्ज्वलित रखा। उन्होंने कहा कि असंतुलित जीवनशैली के कारण मधुमेह, विटामिन बी-12 और डी की कमी जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं, जिनके समाधान में योग और आयुर्वेद अत्यंत उपयोगी हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत सरकार के उस विजन को रेखांकित किया, जिसमें परंपरा की जड़ों में विज्ञान का संरक्षण और जनकल्याण का विस्तार निहित है। उन्होंने बजट में आयुर्वेद के तीन नए अखिल भारतीय संस्थानों सहित आयुष क्षेत्र की घोषणाओं के लिए प्रधानमंत्री का आभार जताया और राजस्थान में आयुष के क्षेत्र में हो रहे कार्यों की सराहना की।
उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में आयुष्मान आदर्श ग्राम योजना के माध्यम से आयुर्वेद और योग द्वारा आरोग्य ग्राम विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद और योग भारत की अमूल्य देन है, जिसे आज पूरा विश्व अपना रहा है। उन्होंने नेशनल आयुष मिशन के तहत वर्ष 2025-26 के लिए राजस्थान को सर्वाधिक 348 करोड़ रुपये आवंटन पर केंद्रीय मंत्री का आभार जताया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने एनआईए परिसर में नवनिर्मित ओपीडी सुश्रुत भवन का लोकार्पण किया तथा प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। कार्यक्रम में विधायक बालमुकुंद आचार्य, केंद्रीय आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा, एनसीआईएसएम अध्यक्ष डॉ. मनीषा कोटेकर, प्रमुख शासन सचिव आयुष सुबीर कुमार, एनआईए कुलपति प्रो. संजीव शर्मा सहित अनेक गणमान्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।