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सभी मतभेद भुलाकर हिंदू समाज संगठित हो, तभी भारत फिर विश्व गुरु बनेगा :  डॉ. शैलेंद्र बोले

देहरादून, 08 फ़रवरी । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेंद्र ने रविवार को कहा कि सभी मतभेद भुलाकर हिंदू समाज को एकजुट होना होगा। इसी एकजुटता से ही भारत पुनः विश्व गुरु के रूप में स्थापित हो सकेगा।

यह विचार प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेंद्र ने रायपुर स्थित स्वयंभू एस्टेट वेडिंग प्वाइंट में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में व्यक्त किए। कार्यक्रम में धार्मिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय चेतना से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश दिए गए। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज के साथ पूर्व में हुए अन्याय और वर्तमान समय की चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

इस मौके पर भारत माता मंदिर के महामंडलेश्वर ललितानन्द गिरी ने धर्म, अध्यात्म शक्ति और राष्ट्र आराधना पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सनातन परंपरा में पृथ्वी को मां के रूप में पूजने की परंपरा रही है और इस राष्ट्र की आराधना करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

प्रसिद्ध कथाव्यास शिव प्रसाद ममगाई ने समाज में घटित हो रही घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हमें अपने पूर्वजों और गुरुओं के मार्ग का अनुसरण करते हुए अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहिए। उन्होंने नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने और समाज को भटकाने वाली प्रवृत्तियों से बचाने की आवश्यकता पर बल दिया।

राष्ट्रीय ओजस्वी कवि श्रीकांत शर्मा श्री ने भारत के वैभव, गुरुओं के त्याग और बलिदान पर आधारित ओजपूर्ण कविताओं का पाठ कर उपस्थित जनसमूह में उत्साह और राष्ट्रभक्ति का संचार किया। सम्मेलन में प्रमुख रूप से रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ, कार्यक्रम अध्यक्ष पदम सिंह थापा, संयोजिका डॉ.आरती रौथान, राजेश थपलियाल, कपिल धर, शिशिर कांत तिवारी, घनश्याम ममगाईं, महेश सोनी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

हिंदू सम्मेलन में पंच परिवर्तन और एकजुटता पर जोर

देहरादून के कृष्णा नगर वार्ड 12 में आज विशाल हिंदू सम्मेलन को बतौर मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह क्षेत्र प्रचार प्रमुख तपन ने कहा कि प्रत्येक हिंदू को अपने जीवन में पंच परिवर्तन अपनाने चाहिए। इसमें सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, स्वास्थ्य आधारित जीवन और नागरिक कर्त्तव्यबोध शामिल हैं। उन्होंने नारी शक्ति पर भी जोर देते हुए कहा कि महिलाएं दो परिवारों को शिक्षित करती हैं, इसलिए बच्चों, विशेषकर लड़कियों को अपनी संस्कृति, बोली और भाषा से परिचित कराना जरूरी है।

मुख्य अतिथि के रूप में कृष्ण गिरी, महंत टपकेश्वर महादेव मंदिर ने उपस्थित लोगों से जातिगत मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट होने का आह्वान किया। सम्मेलन की अध्यक्षता अन्नपूर्णा, पूर्व प्रधानाचार्य आरष कन्या गुरुकुल ने की, जबकि संचालन अनिल डबराल और विशाल जिंदल ने किया।

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