स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए नीतियों व चुनौतियों पर युवा दें गंभीरता से ध्यान: प्रहलाद सिंह पटेल
नरसिहंपुर, 06 फरवरी । मध्य प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास व श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए उनसे जुड़ी नीतियों तथा चुनौतियों पर युवाओं को गंभीरता से ध्यान देना होगा।
मंत्री पटेल शुक्रवार को नरसिंहपुर में स्टेडियम ग्राउंड में आयोजित स्वदेशी मेला उन्नत भारत शुभारंभ- स्वर्णिम भारत वर्ष फाउंडेशन (स्वदेशी जागरण मंत्र की इकाई) के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र के हित में सोचने वाला प्रत्येक नागरिक, चाहे वह किसी भी परिस्थिति में हो, उसे यह आत्ममंथन करना चाहिए कि वैश्विक परिदृश्य में देश की आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन क्यों आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि इतिहास हमें प्रेरणा देता है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने खादी को स्वावलंबन का प्रतीक बनाया। उनका संकल्प अडिग था। उन्होंने जीवनभर खादी पहनकर यह सिद्ध किया कि स्वदेशी को अपनाना ही सच्ची राष्ट्रसेवा है। मंत्री पटेल ने कहा कि हमें विदेशी तकनीकों का उपयोग केवल तभी करना चाहिए, जब वास्तव में उसकी आवश्यकता हो, अन्यथा स्वदेशी संसाधनों, कौशल और उत्पादों को प्राथमिकता देकर ही देश को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाया जा सकता है।
मंत्री पटेल ने कहा कि आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाएं सराहनीय कार्य कर रही हैं। वे स्वदेशी उत्पादों का निर्माण कर करोड़ों रुपये का टर्नओवर प्राप्त कर रही हैं, जो महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जिले में ऐसे कई परिवार भी हैं, जो उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं, किंतु अभी तक उनकी उचित पहचान नहीं बन पाई है। ऐसे प्रयासों को सामने लाना और उन्हें आवश्यक सहयोग प्रदान करना आवश्यक है। मंत्री श्री पटेल ने यह भी कहा कि यदि आवश्यकता हो तो तकनीक की सहायता अवश्य ली जानी चाहिए, लेकिन यह समझना होगा कि असली हुनर हमारे हाथों में है, मशीनों में नहीं। तकनीक केवल साधन है, लक्ष्य नहीं।
कार्यक्रम में अतिथियों ने डॉ. राजकुमार मित्तल द्वारा लिखित स्वदेशी 37 करोड़ स्टार्टअप्स का देश नामक पुस्तक का विमोचन किया। उन्होंने स्वदेशी मेले में लगाई दुकानों का अवलोकन किया। इस अवसर पर महंत बालक दास महाराज, पूर्व राज्यमंत्री जालम सिंह पटेल, पूर्व विधायक हाकम सिंह चढ़ार, रामसनेही पाठक, जिला पंचायत सीईओ गजेन्द्र सिंह नागेश, महंत प्रीतमपुरी गोस्वामी, सुनील कोठारी, पीके मिश्रा, सुधीर दाते, कपिल मलैया, मनीषा, उदय सिंह, आरबी सिंह, उपेन्द्र काले, अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी- कर्मचारी और गणमान्य नागरिक मौजूद थे।
मंत्री पटेल ने कहा कि स्वदेशी उत्पादों के क्षेत्र में मार्केटिंग दूसरी सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि यह विचार करना आवश्यक है कि आखिर स्वदेशी वस्तुओं में ऐसी कौन सी कमी मानी जाती है, जिसके कारण आमजन उन्हें अपनाने में हिचकिचाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक के क्षेत्र में भारत का स्वयं का ब्रांड खड़ा किया जा सकता है और देश के लोग भी वैश्विक स्तर के ब्रांड विकसित करने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि भारत के पास खान-पान सहित अनेक ऐसे उत्पाद हैं, जो अपनी विशिष्टता के कारण विश्व में कहीं और नहीं मिल सकते।
मंत्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय कंपनियों को विदेशों में जाकर उद्योग स्थापित करने के लिए सहयोग देने की बात कही गई है। अब वह समय आ गया है जब भारत की कंपनियां वैश्विक मंच पर आगे बढ़ते हुए दुनिया के विभिन्न देशों में अपने उद्योग स्थापित करें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपनी रोजमर्रा की आवश्यकताओं की सूची बनाकर यह आत्ममंथन करना चाहिए कि वह स्वदेशी वस्तुओं का कितना उपयोग कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपनी जिम्मेदारी को समझने का आह्वान करते हुए कहा कि वे स्वयं का स्वरोजगार स्थापित कर स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा दें, जिससे देश और समाज दोनों सशक्त बन सकें। मंत्री पटेल ने कहा कि स्वावलंबन की यह बात केवल वस्तुओं के निर्माण या लाभांश अर्जित करने तक सीमित नहीं है। हमारा स्वावलंबन भारत को यशस्वी बनाकर विश्व में शांति और सद्भाव का संदेश देने के उद्देश्य से है। स्वावलंबी नागरिक ही सम्मान के साथ जीवन जी सकता है और राष्ट्र निर्माण में प्रभावी भूमिका निभा सकता है।