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बलरामपुर : दूरस्थ गांवों तक दस्तक दे रही मोबाईल पशु चिकित्सा इकाई, पशुपालकों को मिली राहत

बलरामपुर, 05 फ़रवरी । जिले के दूरस्थ एवं ग्रामीण अंचलों में पशुपालकों को पशु चिकित्सा सुविधाओं की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा संचालित मोबाईल पशु चिकित्सा इकाई एक सशक्त माध्यम के रूप में उभरकर सामने आई है। यह पहल उन ग्रामों तक निशुल्क, त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण पशु चिकित्सा सेवाएँ पहुँचा रही है, जहाँ तक पूर्व में पशु चिकित्सा सुविधाओं की पहुँच सीमित थी। लेकिन अब पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य, दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि तथा पशुपालकों की आय सुदृढ़ करने की दिशा अच्छी पहल साबित हो रही है।

जिले में पशुपालकों को सुलभ, त्वरित एवं निशुल्क पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मोबाईल पशु चिकित्सा ईकाई का सफल संचालन किया जा रहा है। कलेक्टर राजेन्द्र कटारा के निर्देशन एवं उप संचालक पशुपालन डॉ. शिशिर कांत पाण्डेय के नेतृत्व में जिले के सभी विकासखण्डों में कुल 06 मोबाईल वेटनरी यूनिट वाहनों का निर्धारित रूट चार्ट अनुसार सुचारू एवं नियमित संचालन सुनिश्चित किया जा रहा है। प्रत्येक मोबाईल वेटनरी यूनिट वाहन के द्वारा प्रतिदिन 03 ग्रामों में पशु चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जाता है। शिविर के माध्यम से पशुपालकों को आवश्यक सेवाएँ प्रदान की जाती हैं। इन शिविरों के माध्यम से पशु उपचार, औषधि वितरण, कृमिनाशक दवा पान, डिटिकिंग, बधियाकरण, टीकाकरण एवं कृत्रिम गर्भाधान जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं दी जा रही हैं। अब पशुपालकों को पशुओं के ईलाज के लिए चिकित्सालयों की दौड़ नहीं लगानी पड़ती। मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई सीधे गांव पहुंचकर निशुल्क त्वरित और गुणवतापूर्ण पशु चिकित्सा सेवाएं दे रही है। इससे समय और पैसे की बचत दोनों हो रही है। साथ ही पशुओं का समय पर उपचार संभव हो पाया है।

उप संचालक पशुपालन डॉ. शिशिर कांत पाण्डेय ने आज गुरूवार काे जानकारी दी है कि, मोबाईल पशु चिकित्सा इकाई द्वारा अब तक कुल 12,327 शिविर आयोजन किया गया है। जिसमे 1,08,698 पशुओं का टीकाकरण, 1,46,471 पशुओं का उपचार, 72,024 औषधि वितरण, 47,219 नमूना जाँच, 11,305 बधियाकरण तथा 506 कृत्रिम गर्भाधान शामिल हैं। वर्तमान में मोबाइल वेटनरी यूनिट की टीमें जिले के सभी विकासखण्डों के दूरस्थ एवं ग्रामीण अंचलों में निरंतर भ्रमण कर चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ विभागीय योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार एवं प्रभावी क्रियान्वयन भी कर रही हैं। इसके अंतर्गत मौसमी टीकाकरण की जानकारी, पशुपालक संगोष्ठियों एवं पशु चिकित्सा शिविरों का आयोजन कर पशुपालकों को किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं से लाभान्वित होने हेतु प्रेरित किया जा रहा है। प्रत्येक मोबाईल यूनिट में 01 पशु चिकित्सक, 01 पैरावेट एवं 01 अटेंडेंट सह चालक के साथ आवश्यक दवाइयाँ एवं आधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध रहते हैं। इसके फलस्वरूप दूरस्थ क्षेत्रों में पशुपालकों को घर के निकट निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण पशु चिकित्सा सुविधा मिल रही है।

राज्य शासन द्वारा पशुपालकों की सुविधा हेतु 1962 टोल-फ्री नंबर भी जारी किया गया है, जिसके माध्यम से सड़क दुर्घटना में घायल अथवा घर पर बीमार पशुओं का त्वरित एवं निःशुल्क उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है। घर-पहुँच सेवा से पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है, जिससे दूध, मांस एवं अंडा उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ पशुपालकों की आय में भी निरंतर वृद्धि हो रही है। मोबाईल पशु चिकित्सा इकाई जिले में पशुपालन को सशक्त बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रहा है।

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