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बीमा क्लेम खारिज करने वाली कंपनी पर एक लाख रुपए का हर्जाना

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि परिवादिया को स्तन कैंसर बीमारी का पहली बार 28 जून 2023 को पता चला था। उनकी पॉलिसी 29 सितंबर 2019 से जारी थी। टॉप अप बीमा योजना, सुपर हेल्थ प्लस में उसे 50 लाख रुपए तक का कवर मिला हुआ था। इसलिए बीमा कंपनी इलाज पर खर्च राशि देने से मना नहीं कर सकती।

मामले के अनुसार उदिता ने विपक्षी कंपनी से खुद, पति व बेटी के लिए 29 सितंबर 2019 को फैमिली मेडिकल एंड हेल्थ पॉलिसी ली, लेकिन परिवादीगण ने इस पॉलिसी पर कोई क्लेम नहीं लिया। इस दौरान पॉलिसी का नवीनीकरण हुआ। इसकी अवधि 27 सितंबर 2023 से 26 सितंबर 2026 तक थी। परिवादिया ने पॉलिसी का 50 लाख रुपए तक का टॉप अप कवर करवा लिया। इस दौरान 24 जून 2023 को परिवादिया को स्तन में सूजन व दर्द की शिकायत हुई। उसे तत्काल अस्पताल में दिखाया तो उसे स्तन कैंसर की बीमारी का पता चला। ऐसे में उसकी कीमोथेरेपी और सर्जरी की गई। इस पर खर्च राशि के पुनर्भुगतान के लिए परिवादिया ने बीमा कंपनी के यहां क्लेम किया, लेकिन कंपनी ने उसका क्लेम यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उसे बीमारी का पता पहले से था और उसने यह तथ्य छिपाया है। इस पर उसने बीमा कंपनी के इस कृत्य को उपभोक्ता आयोग में चुनौती दी। वहीं मामला लंबित रहने के दौरान उसकी मौत हो गई। इस पर उसके परिजन परिवाद में पक्षकार बने।

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