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दरगाह ख्वाजा के उर्स में पीएम की चादर चढ़ाने पर रोक के मामले में गुरुवार को भी होगी सुनवाई

उर्स शुरू होने पर 22 दिसम्बर को पेश की जाएगी प्रधानमंत्री की चादर

अजमेर, 17 दिसम्बर। सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की अजमेर स्थित दरगाह में 814वें उर्स के मौके पर प्रधानमंत्री सहित अन्य संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की चादर चढ़ाने पर रोक लगाने की याचिका पर बुधवार को लिंक कोर्ट ने सुनवाई की। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद गुरुवार को भी सुनवाई करने का आदेश दिया। चांद दिखाई देने पर 21 दिसम्बर से उर्स शुरू होने के दृष्टिगत 22 दिसम्बर को अल्पसंख्यक मामलात मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से भेजी जाने वाली चादर दरगाह में पेश किया जाना प्रस्तावित है।

हिन्दू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने अदालत में यह याचिका पेश की थी। सुनवाई के दौरान बुधवार को वे मौजूद रहे। कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए सिविल लाइन थाना प्रभारी शंभूसिंह भी अतिरिक्त जाब्ते के साथ कोर्ट परिसर में तैनात थे।

विष्णु गुप्ता ने मीडिया के सामने कहा कि प्रधानमंत्री सहित अन्य संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की दरगाह में चादर पेश किए जाने पर लगाई गई याचिका पर सुनवाई हुई है। चादर अल्पसंख्यक मंत्रालय लेकर पहुंचता है इससे हर साल एक साक्ष्य और तैयार हो जाता है। इससे अजमेर दरगाह में संकट मोचन शिव मंदिर होने का दावा कमजोर हो जाता है। उन्होंने कहा कि चादर पर रोक लगाने को लेकर पहले भी दो बार सुनवाई हुई है। विपक्ष इस मामले को लंबा खींचने के लिए लगातार कुछ अडंगे लगा रहा है। विपक्ष ने जो आपत्ति लगाई उसका जवाब दिया गया। कल वापस सुनवाई होगी।

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