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Chhattisgarh

बलरामपुर : सेरंगदाग बॉक्साइट माइंस में श्रमिकों का शोषण उजागर, प्रशासन से कार्रवाई की मांग

श्रमिकों का कहना है कि अक्टूबर 2024 से खदान में 150 से अधिक मजदूर काम कर रहे हैं, लेकिन अब तक किसी भी श्रमिक का अनिवार्य ‘ए-फॉर्म’ पंजीकरण नहीं किया गया है। यह सीधे तौर पर श्रम कानूनों का उल्लंघन है। लंबे समय से काम लेने के बावजूद मजदूरों को अस्थायी बताकर स्थायित्व से वंचित रखा जा रहा है।

न्यूनतम मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा से वंचित मजदूर

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि श्रमिकों को निर्धारित न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा है। भविष्य निधि (पीएफ), कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) और चिकित्सा सुविधा जैसी बुनियादी सामाजिक सुरक्षा से भी उन्हें वंचित रखा गया है। खदान परिसर में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते किसी भी समय गंभीर दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।

अमानवीय हालात में कराया जा रहा कार्य

श्रमिकों का आरोप है कि उनसे अत्यंत कठिन और अमानवीय परिस्थितियों में काम कराया जा रहा है। कंपनी प्रबंधन अपनी शर्तों पर कार्य कराने के लिए स्थानीय मजदूरों को हटाकर बाहरी श्रमिकों की नियुक्ति कर रहा है, जिससे स्थानीय लोगों का रोजगार भी प्रभावित हो रहा है।

उच्चस्तरीय जांच की मांग, पहले भी सौंपा गया था ज्ञापन

श्रमिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, सभी मजदूरों का नियमानुसार पंजीकरण किया जाए, उचित वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा कार्यस्थल पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हों। साथ ही दोषी कंपनी प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

इस दौरान बड़ी संख्या में श्रमिक मौजूद रहे। श्रमिक प्रतिनिधि राहुल गुप्ता ने बताया कि इससे पहले भी इस मुद्दे को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे श्रमिकों में गहरी नाराजगी है।

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