जिंदल के जनसुनवाई के खिलाफ ग्रामीण बैठे धरने पर
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि पहले से ही तमनार में लगे उद्योग व कोल माइंस से आदिवासी विस्थापन की मार झेल रहे है, साथ ही जंगल कट रहे है औऱ पर्यावरण काफी प्रदूषित हो गया है l विकास के नाम पर अब औऱ विनाश बर्दाश्त नहीं किया जायेगा l जन सुनवाई का विरोध करने वाले ग्रामीणों ने आज रविवार काे धरना स्थल धौरा भाठा में आए मीडिया कर्मियों को तहसीलदार रायगढ़ का एक लिखित आदेश पत्र दिखाते हुए बताया कि इस तरह सरकार हमारे आंदोलन को तोड़कर जिंदल की जनसुनवाई को सफल बनाने का प्रयास कर रही है। इस बात का प्रमाण यह है कि अभी कुछ दिनों पहले दोनो राष्ट्रीय पार्टी के कुछ नेता जो हमारे आंदोलन को लीड कर रहे थे, वो अब मैदान छोड़कर भाग चुके हैं। दूसरी ओर प्रशासन हर स्तर पर विरोध को दबाने के प्रयास में जुटी है l ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है l अब सवाल यह उठ रहा है कि जब जनता विरोध कर रही है तो जनसुनवाई कैसे होगी? क्या जनसुनवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जाएगी?