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मां मनसा पूजा की हुई भव्य पूजा

लेकिन इस पूजा का सबसे अनोखा दृश्य तब देखने को मिला जब एक स्थानीय अनेक भक्त अपने गले में जहरिले जीवित सर्प लपेटकर हैरतअंगेज करतब दिखाए। सैकड़ों आंखें विस्मय से उस दृश्य को देखती रह गईं। परंपरा के अनुसार, मनसा देवी सर्पों की देवी मानी जाती हैं और यह माना जाता है कि उनकी पूजा करने से सर्पदंश से रक्षा होती है तथा परिवार में सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य बना रहता है। यही कारण है कि सर्प इस पूजा का अभिन्न हिस्सा माने जाते हैं और उनके साथ किए गए अनुष्ठान को शुभ संकेत समझा जाता है।

पूरे आयोजन में मोहूली, पाठानडीहा और चंचलदा गांव के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। तालाब से शुरू हुई कलश यात्रा जब गांव की गलियों से होती हुई मनसा थान पहुंची, तो ढोल की थाप और जयकारों की गूंज से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच कलशों को स्थापित कर देवी की विधिवत पूजा-अर्चना की गई।

पूजा आयोजन में कमेटी के अध्यक्ष हृषिकेश गिरि, कोषाध्यक्ष सुमन तिवारी, उपाध्यक्ष सूरज देहरी सहित सागर सिंह, अबनी देहरी, भवानी देहरी, शंभू बसाई, सुभाष देहरी, पलाश गिरि, नारायण भक्ता, बापी भालू, बासुदेव महंती, शिवलाल देहरी, बंकिम देहरी, सोनू देहरी, आकाश तिवारी और आकाश पातर ने मिलकर आयोजन को सफल बनाया।

मोहूली की यह मनसा पूजा न केवल आस्था और परंपरा का प्रतीक बनी, बल्कि यह भी दिखा गई कि लोक संस्कृति में भक्ति के साथ साहस और श्रद्धा का संगम किस तरह एक अद्भुत अनुभव बन जाता है।

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