संघ शताब्दी वर्ष पर कालाअम्ब में स्वयंसेवकों ने किया पथ संचलन
इस अवसर पर लगभग 211 स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में उपस्थित रहे, जबकि समाज के 80 से अधिक बंधु-भगिनी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्य वक्ता अनिल कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में पूज्य डॉक्टर केशवराव बलिराम हेडगेवार जी ने हिंदू समाज को संगठित करने के उद्देश्य से की थी। उन्होंने कहा कि सौ वर्षों की यात्रा में संघ ने उपेक्षा, विरोध, समर्थन और सहभाग जैसे अनेक चरण देखे हैं, लेकिन हर परिस्थिति में संघ ने अपने मूल कार्य—शाखा—को सर्वोपरि रखा है। शाखा ही वह केंद्र है, जहां से राष्ट्रभक्त, चरित्रवान और संस्कारित स्वयंसेवकों का निर्माण होता है।
अनिल कुमार ने कहा कि “सरकारें देश को सशक्त नहीं बनातीं, संस्कार ही राष्ट्र को महान बनाते हैं।” उन्होंने समाज में बढ़ती पश्चिमी सभ्यता की कुरीतियों पर चिंता जताते हुए कहा कि इनके प्रभाव से परिवारों में बुजुर्गों की उपेक्षा बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि संघ अपने शताब्दी वर्ष की ओर अग्रसर होते हुए “पंच परिवर्तन”—परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य, सामाजिक समरसता और स्वदेशी—के लक्ष्यों पर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को पंच प्रण को अपने जीवन में धारण करना चाहिए, क्योंकि इन्हीं से समाज और राष्ट्र में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।