आर्ट और क्राफ्ट प्रदर्शनी शिल्पकार का हुआ आगाज
प्रदर्शनी में सबसे ख़ास आकर्षण का केंद्र रहा प्रसिद्ध रत्न शिल्पकार, पृथ्वीराज कुमावत द्वारा बनाया गया पन्ना रत्न जड़ित उत्कृष्ट प्राकृतिक कृति जिसके दोनों ओर गणेश जी की जटिल आकृतियाँ उकेरी गई हैं और इसे बड़ी ही कुशलता और बारीकी से तैयार किया है। इस नक्काशी को नाज़ुक फूलों और पत्तियों से सजाया गया है, जो कारीगर के असाधारण कौशल को दर्शाता है। मूर्ति का वज़न 2367 कैरेट, ऊँचाई 8 सेमी, चौड़ाई 9 सेमी तथा गहराई 6 सेमी है। राज्य स्तरीय एवं कलारत्न पुरस्कार से सम्मानित, सुनीश मारू की बजरंग बलि की विश्व प्रसिद्ध जेमस्टोन पेंटिंग जो अन्यन्त्र कही नही बनाती है, इस प्रकार की पेंटिंग को कांच के पीछे से बनाया जाता है। राम सोनी द्वारा भगवान कृष्ण की यमुना तट पर कदम वृक्ष के नीचे अपनी गाय चराते हुए बैठे सांझी आर्ट (पेपर कटिंग) चित्र जो गोचारण लीला को दर्शाता है और शिपगुरु विनोद कुमार जांगिड़ की चन्दन की लकड़ी पर नक्काशी से भगवान महावीर के मंदिर में भगवान की 24 तीर्थंकरों का निवास है।
ये शिल्पकार, जो अपने-अपने शिल्प में निपुण हैं, अपनी परंपराओं को संरक्षित और विकसित कर रहे हैं, जिससे भारतीय कला को वैश्विक स्तर पर पहचान मिल रही है। उनकी अद्वितीय कारीगरी और समर्पण भारत की शिल्पकला की अनंत सुंदरता और विविधता को जीवंत बनाए रखने का उदाहरण है।