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युग हत्याकांड: हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी हिमाचल सरकार

अतिरिक्त महाअधिवक्ता ने कहा कि निचली अदालत द्वारा दी गई फांसी की सजा का हाईकोर्ट द्वारा पुष्टि करना आवश्यक था, लेकिन अब कोर्ट ने तेजिंद्र पाल को बरी कर दिया है और चंद्र व विक्रांत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। जबकि तीनों के खिलाफ सबूत समान थे और अपहरण से लेकर हत्या तक तीनों की भूमिका बराबर थी। तेजिंद्र पाल की गाड़ी का इस्तेमाल अपहरण में हुआ, और 48 घंटे तक तीनों आरोपी लगातार आपस में संपर्क में रहे। सरकार इस आदेश से पूरी तरह असंतुष्ट है और सुप्रीम कोर्ट में निचली अदालत का फैसला लागू करवाने की दिशा में हरसंभव प्रयास करेगी।

गौरतलब है कि आज आए फैसले में हिमाचल हाईकोर्ट की खंडपीठ न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति राकेश कैंथला ने दोषियों चंद्र शर्मा और विक्रांत बख्शी की फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों को प्राकृतिक जीवन के अंत तक जेल में ही रहना होगा। वहीं तीसरे आरोपी तेजिंद्र पाल सिंह को आरोपों से बरी कर दिया गया। अदालत ने कहा कि इस मामले में फांसी की सजा बरकरार रखना संभव नहीं है।

बता दें कि 6 सितम्बर 2018 को शिमला की जिला एवं सत्र अदालत ने इस मामले को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” की श्रेणी में मानते हुए तीनों आरोपियों को मौत की सजा सुनाई थी। अदालत ने माना था कि आरोपियों ने मासूम युग को अमानवीय यातनाएं देकर बेरहमी से हत्या की और फिरौती की रकम मांगने की कोशिश की।

मामला जून 2014 का है, जब शिमला के रामबाजार से चार वर्षीय मास्टर युग का अपहरण हुआ था। पड़ोस में रहने वाले तीनों आरोपियों ने फिरौती के लिए युग का अपहरण किया और पिता से साढ़े तीन करोड़ रुपये की मांग की। रकम न मिलने पर मासूम को बर्बर यातनाएं देने के बाद उसके शरीर पर पत्थर बांधकर पानी की टंकी में फेंक दिया गया। अगस्त 2016 में शहर के भराड़ी स्थित पेयजल टैंक से युग का कंकाल बरामद हुआ। जांच सीआईडी को सौंपी गई, जिसने ठोस सबूतों के आधार पर आरोप पत्र दाखिल किया। दस माह चले ट्रायल के बाद निचली अदालत ने 2018 में तीनों को फांसी की सजा सुनाई थी।

इधर, हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद युग के परिजनों ने गहरी नाराजगी जताई है। युग के पिता विनोद गुप्ता ने कहा कि 11 साल बीतने के बाद भी बेटे को न्याय नहीं मिला। दो दोषियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलकर औऱ एक को बरी करने के फैसले ने हमें और पीड़ा दी है। हमारी यही मांग है कि दोषियों को फांसी दी जाए। हम भी सुप्रीम कोर्ट जाकर न्याय की गुहार लगाएंगे।

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