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दुर्ग जिले में उचित मुआवजा देने की मांग को लेकर भारतमाला प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य को किसानों ने रोका, 17 गिरफ्तार

दुर्ग जिले में उचित मुआवजा देने की मांग को लेकर भारतमाला प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य को किसानों ने रोका, 17 गिरफ्तार

दुर्ग/रायपुर, 15 मई (हि.स.)। दुर्ग जिले में आज हनोदा सहित 5 गांवों के सैकड़ों किसानों ने भारतमाला प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य को रुकवाकर प्रदर्शन किया और भूमि का उचित मुआवजा देने की मांग की। ग्रामीणों ने अधिकारियों पर मुआवजा वितरण में भ्रष्ट्राचार के आरोप भी लगाए। पुलिस ने प्रर्दशनकारी 17 किसानों को गिरफ्तार किया है। केंद्र सरकार की भारतमाला परियोजना के लिए जिले के दुर्ग और पाटन ब्लॉक के 26 गांवों में 1349 किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई है।

प्रदर्शनकारी किसानों का आरोप है कि उनकी भूमि का उचित मुआवजा नहीं मिला है। मामले में अधिवक्ता और किसान जे.के. वर्मा ने बताया है कि भूमि-अधिग्रहण से लेकर मुआवजा की गणना में व्यापक गड़बड़ी की गई है। इससे भू-स्वामियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। मामले की गंभीरता से जांच की गई तो, कई और गड़बडिय़ां सामने आएंगी। उनका कहना है कि बड़ी जमीनों को हेक्टेयर और छोटी जमीनों को एकड़ के अनुसार मुआवजा दिया गया है। छोटी भूमि को वर्गफीट के अनुसार मुआवजा दिया गया है, जिनसे उन्हें कई गुना नुकसान हो रहा है। बताया जाता है कि अधिकारियों ने कई किसानों के खेतों के परिसंपत्तियों पेड़, नलकूप, फेंसिंग, मकान आदि का मूल्यांकन छोड़ दिया है अथवा इसके एवज में बेहद कम राशि दर्ज कर दी गई है। इससे संबंधित करीब 300 आपत्तियां भू-अर्जन अधिकारियों के पास लंबित है।

किसानों का कहना है कि जब उन्होंने भूमि खरीद की थी तब उसका बाजार मूल्य कुछ और था, लेकिन आज उन्हें उनकी भूमि का 10 प्रतिशत मुआवजा ही मिल पा रहा है। एक भू-स्वामी ने बताया कि उन्होंने 15 साल पहले जो भूमि खरीद की थी उसका आधा पैसा भी मुआवजे में उन्हें नहीं मिल पा रहा है। भारतमाला परियोजना में किसानों को दिए जा रहे मुआवजे को लेकर कई किसानों ने कोर्ट में याचिका दायर की है।मुआवजे निर्धारण में कई किसानों के सिंचित को असिंचित, सड़क को असिंचित बता देने जैसी त्रुटियों की शिकायत है। जबकि 20 मीटर तक दूरी को सड़क की जमीन मानकर मुआवजा तय किया जाना चाहिए। वहीं पटवारी प्रपत्र में सिंचित जमीन की मुआवजा असिंचित से कही ज्यादा है।

किसान अपनी शिकायत नेशनल हाइवे और जिला प्रशासन के अफसरों के पास आवेदनों के साथ न्यायालय में भी याचिका तक लगा चुके हैं। न्यायालय में मामला विचाराधीन है।

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