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उरांव समाज ने मनाया जेष्ठ जतरा महापर्व

उरांव समाज ने मनाया जेष्ठ जतरा महापर्व

पश्चिम सिंहभूम, 13 मई (हि.स.)। पश्चिम सिंहभूम (चाईबासा) जिले में उरांव समाज की ओर से मंगलवार को पारंपरिक जेष्ठ जतरा महापर्व 12 और 13 मई को पूरे उल्लास और सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया गया। यह पर्व रोहतासगढ़ की वीरांगनाएं सिनगीदाई और कैलीदाई की शौर्यगाथा को स्मरण करने और आदिवासी अस्मिता को सहेजने का प्रतीक है।

ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार, रोहतासगढ़ में उरांवों का स्वतंत्र राजशासन था। एक बार सरहुल पर्व के अवसर पर जब मुगलों ने अचानक हमला किया, तब राजा की पुत्री सिनगीदाई और सेनापति की पुत्री कैलीदाई ने हजारों महिलाओं के साथ पुरुषों का वेश धारण कर युद्ध किया और मुगलों को तीन बार पराजित किया। इस गौरव की स्मृति में तीन सफेद लकीरों वाला नीला झंडा आज भी जतरा पर्व का प्रमुख प्रतीक है।

12 मई को पर्व की शुरुआत सातों अखाड़ों की युवतियों द्वारा खेतों से मिट्टी लाकर अखाड़ों की सजावट से हुई। रातभर पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य के साथ जागरण हुआ। 13 मई को पूर्व अखाड़ा में पाहन फागु खलखो, सहयोगी दुर्गा कुजूर और मंगरू टोप्पो द्वारा विधिपूर्वक पूजा संपन्न कराई गई।

इस अवसर पर समाज के प्रमुख जनों में मुखिया लालू कुजूर, राजेन्द्र कच्छप, शंभू टोप्पो, सीताराम मुंडा, चमरू लकड़ा, रवि तिर्की, बिरसा लकड़ा, लखन टोप्पो, बुधराम कोया, मथुरा कोया, कर्मा कुजूर, बंधन कुजूर, जगरनाथ टोप्पो, सूरज टोप्पो, अविनाश कुजूर, आकाश टोप्पो और सावन लकड़ा सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

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