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राजस्थान सीमा पर 24/7 राफेल-मिराज कॉम्बैट पेट्रोलिंग: ब्लड बैंक, ऑक्सीजन यूनिट अलर्ट!

ऑपरेशन सिंदूर के बाद, राजस्थान की सीमाओं को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। सुरक्षा मामलों में बीएसएफ के जवानों की तैनाती के साथ-साथ एयरफोर्स भी अलर्ट मोड में आ गया है। वेस्टर्न सेक्टर के सभी एयरबेस को उच्च सतर्कता पर रखा गया है, जिससे सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी संदिग्ध गतिविधि अनदेखी न हो। बीएसएफ ने अपनी गश्त को बढ़ाने के लिए अतिरिक्त बल को तैनात किया है, ताकि वे जीरो लाइन के पास स्थित तारबंदी के गेट के जरिए निगरानी कर सकें। जवानों को दिए गए निर्देशों के अनुसार, वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार रहेंगे।

अभी हाल ही में, एंटी ड्रोन सिस्टम भी 24 घंटे सक्रिय कर दिए गए हैं, ताकि किसी भी खतरे को झेलने में सक्षम हो सकें। बीएसएफ के राजस्थान फ्रंटियर आईजी, एमएल गर्ग ने बताया कि सरहदी गांवों को खाली नहीं करवाया गया है, लेकिन स्थानीय निवासियों को तैयार रहने के लिए कहा गया है। जिससे जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके। इसके अलावा, बैकअप के लिए जवानों की अतिरिक्त टुकड़ियों को बाहर निकाला गया है। वेस्टर्न सेक्टर के पांच से अधिक एयरबेस से लड़ाकू विमानों की उड़ानें जारी हैं, जिसके तहत ऑपरेशन के बाद पूरे क्षेत्र में विमानों की तेज गर्जना सुनाई दी।

इसके अलावा, एयर डिफेंस सिस्टम को भी प्रमुख शहरों में सक्रिय कर दिया गया है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि अगर पाकिस्तान का कोई विमान भारतीय सीमा में घुसता है तो उसे हवा में समाप्त किया जा सके। भारतीय थल सेना पूरी तरह से तैयार है और सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात हर फॉर्मेशन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। इस संदर्भ में, सीएम भजनलाल ने पुलिस विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें उन्होंने उपद्रवी तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के तत्काल निर्देश दिए।

सीमावर्ती क्षेत्र में स्थिति को लेकर संवेदनशीलता बरतते हुए, सीएम ने सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले तत्वों पर नजर रखने का निर्देश दिया है। अस्पतालों में आवश्यक दवाओं, ऑक्सीजन और एम्बुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित करने की बात भी की गई है। इसके साथ ही, रेलवे और राज्य कर्मचारियों की छुट्टियों को रद्द कर दिया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

राजस्थान के विभिन्न स्थानों पर 1999 के कारगिल युद्ध के संदर्भ में मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस दौरान, हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन का प्रयोग किया गया। विभिन्न शहरों और कस्बों में बचाव के तरीकों के बारे में जानकारी दी गई। इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य नागरिकों को आपात स्थितियों में सुरक्षा उपायों से अवगत कराना था। शाम को पूरे राज्य में ब्लैकआउट की प्रैक्टिस भी आयोजित की गई, जिससे हर नागरिक आपात स्थिति में अधिक सतर्क और तैयार रह सके। वर्तमान में यह सभी गतिविधियाँ केवल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए की जा रही हैं, जिससे कोई भी अनियोजित घटना से निपटने में सहायता मिल सके।

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