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गुजरात में मिनी बांग्लादेश के निर्माता यूपी के लल्ला बिहारी: नागरिकता दिलाने वाले ‘फरिश्ता’!

**एटा के नूर अख्तर: भाई लल्ला बिहारी को बताया गया फरिश्ता, आरोपों को किया खारिज**

एटा के नूर अख्तर का कहना है कि उनके भाई लल्ला बिहारी ने हमेशा गांव के लोगों की मदद की है और उन्हें बेहतर जीवन देने का प्रयास किया है। नूर के अनुसार, लल्ला ने न केवल गांव में बेटियों की शादी में मदद की, बल्कि बेरोजगारों को पैसे देकर रोजगार भी दिलवाया। इतना ही नहीं, लल्ला ने कई लोगों के घर भी बनवाए और हमेशा अपने लोगों के साथ खड़े रहे। गरीबी से उबरने के बाद, वह गरीबों के दुख-दर्द को बिना कहे ही समझते हैं। उन्हें गांव में बिना किसी संदेह के एक फरिश्ते की तरह देखा जा रहा है और जिस पर आरोप हैं, वे सभी निराधार हैं। उल्लेखनीय है कि लल्ला अहमदाबाद में झाड़ू के व्यवसाय में संलग्न हैं।

हाल ही में लल्ला बिहारी को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जिसके तहत उन पर आरोप है कि उन्होंने बांग्लादेशियों को अवैध रूप से भारतीय नागरिकता, आधार कार्ड और पैन कार्ड बनवाने का कार्य किया। उनके खिलाफ यह आरोप भी लगाया गया है कि उन्होंने अहमदाबाद में हजारों बांग्लादेशियों को बसाने में मदद की। इसके फलस्वरूप गुजरात सरकार ने उनके अवैध निर्माणों को ढहा दिया। लल्ला की गिरफ्तारी के बाद, उनके परिजनों और गांव के लोगों ने मीडिया से बातचीत की और उनके खिलाफ लगे सभी आरोपों को झूठा बताया।

भास्कर की एक टीम ने एटा के भरगैन नगर पंचायत में जाकर इस मामले की गहराई में जाने की कोशिश की। वहां की आबादी लगभग 60,000 है, जिसमें से अधिकांश लोग मुस्लिम हैं। लल्ला का असली नाम मोहम्मद अख्तर बताया गया है। उसकी कुल संख्या में 1,000 से ज्यादा रिश्तेदार इसी क्षेत्र में रहते हैं। ग्रामीणों ने लल्ला को ‘फरिश्ता’ बताते हुए कहा कि वह हमेशा उनकी मदद करते हैं और किसी भी कठिनाई में उनके साथ खड़े रहते हैं।

लल्ला के दो मंजिला घर की चर्चा भी लोगों ने की। उनके भांजे मोहम्मद काशिम ने स्पष्ट किया कि लल्ला अपने परिवार का पूरा खर्च उठाते हैं और गांव के विकास में भी योगदान देते हैं। उन्होंने कहा कि लल्ला के बिना गांव के युवाओं का यह हाल नहीं होता। लोग उनकी बदौलत ही रोजगार में लगे हुए हैं और उनके ऊपर लगे आरोपों को मानने को वे तैयार नहीं हैं।

इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों के बयान हैं कि लल्ला उन परिवारों की मदद कर रहे हैं जो गुजरात में उसकी सहायता पर निर्भर हैं। उसकी सम्पत्ति में करोड़ों की संपत्ति, कई फ्लैट और फॉर्महाउस शामिल हैं, जिससे यह भी स्पष्ट होता है कि लल्ला का व्यापार गतिविधि काफी विस्तार ले चुकी है। एसी जानकारी से यह प्रतीत होता है कि आरोपों की जांच जारी रहेगी और लल्ला की राहत के लिए गांव के लोग एकजुट रहेंगे।

**कानूनी प्रक्रिया और समाचार अपडेट**

इस बीच, एटा में एक और मामला सामने आया है जिसमें मुस्कान और साहिल को जमानत नहीं मिली है। मेरठ कोर्ट ने कहा कि उन्होंने जघन्य अपराध किया है। इसका नतीजा यह है कि मुस्कान ने रोते हुए जमानत की अपील की, जबकि उनके वकील ने स्थिति को हाईकोर्ट में ले जाने की बात कही है। यह भी एक खबर है, जो स्थानीय न्यायिक प्रणाली के प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है।

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