डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के अधीन होगा संस्थान -भजनलाल सरकार का साहसी कदम!
जयपुर में एक नया अध्याय लिखा जाने वाला है, जहां अंबेडकर संविधान अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान की स्थापना की जा रही है। यह संस्थान भारतीय संविधान के अध्ययन, उसके इतिहास, दर्शन और सिद्धांतों पर गहरा ध्यान देगा। इसके अंतर्गत न केवल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विश्वविद्यालयों से सहयोग etabler किया जाएगा, बल्कि ऑफलाइन और ऑनलाइन शॉर्ट टर्म कोर्सेज भी शुरू किए जाएंगे। वहीं, रिफ्रेशर प्रोग्राम और कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी। यह विशेष संस्थान डॉ. भीमराव अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय के तत्वाधान में कार्य करेगा।
सरकार ने इस संस्थान को स्थापित करने के लिए 50 करोड़ रुपए की लागत का प्रस्ताव भेजा है, जिसे प्रशासनिक स्वीकृति पहले ही मिल चुकी है। आगामी 2025-26 के बजट में इस संस्थान की स्थापना के संबंध में घोषणा की गई थी। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल ने इसके जरिए एक ऐसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान की कल्पना की है, जो राजस्थान को एक विशेष पहचान दिला सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत एक सार्थक और महत्वपूर्ण पहल होगी, जो संविधान के मूल्यों और सिद्धांतों को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाएगी।
अंबेडकर संविधान अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान का इन्फ्रास्ट्रक्चर विशेष रूप से आधुनिक सुविधाओं के साथ तैयार किया जाएगा। इस संस्थान में एक अलग भवन तैयार किया जाएगा, जिसमें कॉन्फ्रेंस हॉल (150 सीटों की क्षमता), स्मार्ट क्लास रूम (60 सीटों की क्षमता), डॉर्मिटरी रूम, एक प्रशासनिक भवन, पुस्तकालय (100 सीटों की क्षमता), ई-लाइब्रेरी और पार्किंग जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इसके अलावा, कुल 30 फैकल्टी पदों के साथ-साथ लगभग 20 नॉन-टीचिंग पदों की भी व्यवस्था की जाएगी।
डॉ. भीमराव अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो. अल्पना कटेजा का कहना है कि “सरकार की बजट घोषणा की अनुपालना में अंबेडकर संविधान अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान का प्रस्ताव बना कर भेजा गया है,” जबकि रजिस्ट्रार वीरेंद्र वर्मा ने स्पष्ट किया है कि “प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है और हम सरकार के निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ेंगे।”
संस्थान की स्थापना का उद्देश्य न केवल विद्यार्थियों को संविधान के बारे में जानकारी प्रदान करना है, बल्कि उनके लिए इंटर्नशिप और शोध के अवसर भी सुनिश्चित करना है। इससे संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और भारतीय समाज में इसके महत्व को और अधिक वास्तविकता में लाने का प्रयास किया जाएगा। इस प्रकार, अंबेडकर संविधान अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान भारतीय संविधान के मूल्य और सिद्धांतों को फैलाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है, जिससे समाज के सभी वर्गों को लाभ होगा।