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22 साल बाद KGMU कार्य परिषद के चुनाव: 12 अप्रैल को नए सदस्यों का चयन!

केजीएमयू (किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी) में लगभग 22 साल के लंबे अंतराल के बाद कार्य परिषद में निर्वाचित सदस्यों के चुनाव की प्रक्रिया एक बार फिर शुरू होने जा रही है। अब तक, कार्य परिषद बिना निर्वाचित सदस्यों के अपनी गतिविधियाँ संचालित कर रही थी, जो कि एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक समस्या बन गई थी। इस व्यवस्था में सुधार लाने के लिए, चुनाव 12 अप्रैल को आयोजित किए जाने का निर्णय लिया गया है। इस सन्दर्भ में वोटर लिस्ट भी जारी कर दी गई है, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी योग्य मतदाता मतदान प्रक्रिया में भाग ले सकें।

केजीएमयू को 2002 में विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया था, और इसके अधिनियम के अनुसार, कार्य परिषद में कुल 22 सदस्य होते हैं। इनमें चार सदस्य विश्वविद्यालय अदालत द्वारा निर्वाचित होकर आते हैं। पिछले कई वर्षों में चुनाव की प्रक्रिया नहीं होने के कारण परिषद के सदस्यों की संख्या में काफी कमी आई है, जिससे परिषद की कार्यक्षमता प्रभावित हुई है। इस स्थिति के चलते, परिषद में केवल कुलपति के अधीनस्थ सदस्यों की ही नुमाइंदगी रह गई थी, जो कि राजभवन तक में शिकायतों का कारण बन गया था।

अब, 12 अप्रैल को होने वाले चुनाव में कार्य परिषद के चार सदस्यों के साथ-साथ दंत परिषद, नई दिल्ली के एक सदस्य का भी चुनाव होना तय किया गया है। यह चुनाव न केवल विश्वविद्यालय के शासन व्यवस्था को पुनः स्थिर करने में मदद करेगा, बल्कि विश्वविद्यालय के अन्य सदस्यों की भी भागीदारी सुनिश्चित करेगा। लंबे समय तक निर्वाचित सदस्यों की अनुपस्थिति ने कार्य परिषद की गतिशीलता को बाधित किया था, जिसे अब इस चुनाव के माध्यम से ठीक किया जाएगा।

इस शेड्यूल के अनुसार, कार्य परिषद का पुनर्गठन न केवल विश्वविद्यालय के प्रशासन में नई ऊर्जा भरेगा, बल्कि यह विश्वविद्यालय के भीतर संवैधानिक प्रक्रियाओं की पुनःस्थापना का भी प्रतीक होगा। यह चुनाव महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे न केवल कार्य परिषद की कार्यप्रणाली में सुधार होगा, बल्कि इससे विश्वविद्यालय के विकास और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी पारदर्शिता आएगी। छात्र और स्नातक दोनों ही इस बदलाव को लेकर उत्सुक हैं, क्योंकि इससे विश्वविद्यालय की स्वायत्ता में वृद्धि होने की संभावना है।

अंततः, यह कहना गलत नहीं होगा कि केजीएमयू में होने वाला यह चुनाव न केवल歷史िक महत्व का है, बल्कि यह आने वाले समय में विश्वविद्यालय के लिए एक नई दिशा निर्धारित करने की संभावनाएं भी प्रस्तुत करता है। आशा है कि इस चुनाव प्रक्रिया के परिणामस्वरूप एक सशक्त और जिम्मेदार कार्य परिषद का गठन होगा, जो विश्वविद्यालय की उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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