सर्वाइकल कैंसर जागरूकता: फ्री स्क्रीनिंग कैंप का मौका!
**अमृतसर |** अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर, अमृतसर ग्रुप ऑफ कॉलेजेस के महिला सशक्तिकरण प्रकोष्ठ ने फोर्टिस अस्पताल और फुलकारी (डब्ल्यूओए) के सहयोग से एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाना और महिलाओं के लिए मुफ्त स्क्रीनिंग कैंप प्रदान करना था। इस कैंप में स्थानीय महिलाओं को सेवाएं दी गईं, ताकि वे अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान कर सकें।
कार्यक्रम में प्रमुख विशेषज्ञों की भागीदारी ने इसे और भी प्रभावशाली बना दिया। डॉ. रुचिका और डॉ. प्रीति सिंह देव, जो प्रसूति और स्त्री रोग विशेषज्ञ के तौर पर जानी जाती हैं, ने महत्वपूर्ण वार्ताएं प्रस्तुत कीं। उन्होंने सर्वाइकल कैंसर से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की, जिसमें इसके लक्षण, कारण और इलाज के विकल्प शामिल थे। विशेषज्ञों द्वारा दिए गए दवाब से इस बीमारी की गंभीरता और इसके निवारण के तरीकों को समझाने का प्रयास किया गया।
फुलकारी डब्ल्यूओए की परोपकारी सलाहकार प्रियंका गोयल ने भी कार्यक्रम में अपनी उपयोगी बातें साझा कीं। उन्होंने इस अवसर पर सर्वाइकल कैंसर के फैलने के कारणों, इसके प्रारंभिक लक्षणों और इससे बचाव के लिए अपनाए जाने वाले उपायों के बारे में जानकारी दी। प्रियंका ने महिलाओं को सावधान किया कि नियमित जांच और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी रखना कितना महत्वपूर्ण है, जिससे इस बीमारी को समय रहते पहचाना जा सके।
इस जागरूकता कार्यक्रम में भाग लेने वाली महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए और उन्होंने बताया कि इस तरह के आयोजनों से उन्हें अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की प्रेरणा मिली है। कार्यक्रम के अंत में, सभी प्रतिभागियों को स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य जांच की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई। यह आयोजन महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति एक सकारात्मक कदम साबित हुआ, जो उन्हें अपनी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ सशक्त बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण योगदान है।
इस प्रकार, अमृतसर ग्रुप ऑफ कॉलेजेस ने महिलाओं की भलाई के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है, जो न केवल जागरूकता बढ़ाने में सहायक है, बल्कि उन सामाजिक मुद्दों को भी उजागर करता है जो महिलाओं के स्वास्थ्य में बाधा पहुँचाते हैं। ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन से समुदाय में सकारात्मक बदलाव लाने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे महिलाओं को अपने स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति सजग और सशक्त बनाने में मदद मिलती है।