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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर लोकगीत अकादमी ने आयोजित की रोमांचक संगोष्ठी!

**अमृतसर में महिला अधिकारों पर संगोष्ठी का आयोजन**

अमृतसर स्थित लोकगीत अनुसंधान अकादमी ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रगतिशील लेखक संघ की अमृतसर इकाई के सहयोग से विरसा विहार में एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का लक्ष्‍य महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ावा देना था। संगोष्ठी में विभिन्न वक्ताओं ने महिला अधिकारों एवं लैंगिक समानता की आवश्यकता पर जोर दिया। इस कार्यक्रम के दौरान, विशेष रूप से महिला अधिकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए जाने जाने वाले डॉ. अरविंदर कौर काकड़ा को “स्वर्गीय विमला डांग पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। वहीं, मानवाधिकारों के क्षेत्र में सक्रिय नताशा नरवाल को “मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं शांति दूत अस्मा जहांगीर पुरस्कार” प्रदान किया गया। दोनों विजेताओं को ग्यारह-ग्यारह हजार रुपए का नकद पुरस्कार भी मिला।

संगोष्ठी में बोलते हुए, नताशा नरवाल ने महिलाओं की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज भी कई महिलाएं सामाजिक दबाव के कारण अपने घरों में कैद रहने को मजबूर हैं, और उन्हें अपनी स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करना पड़ता है। इस बात पर सीपीआई नेता दसविंदर कौर ने भी अपने विचार रखे और बताया कि पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं की स्थिति अब भी पिछली सदियों की तरह ही है। उनकी बातों में गहराई थी और उन्होंने समाज में आवश्यक बदलाव के लिए एकजुटता का आह्वान किया।

डॉ. इंद्रजीत गिल ने संगोष्ठी में एक महत्वपूर्ण बिंदु उठाया कि महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ता है और यह किसी भी समाज के लिए एक चेतावनी है। इस संदर्भ में डॉ. अरविंदर कौर काकड़ा ने कहा कि महिलाएं आज भी कई प्रकार के शोषण का सामना कर रही हैं, और उन्हें वास्तविक स्वतंत्रता हासिल करने के लिए एक साझा प्रयास की आवश्यकता है।

इस संगोष्ठी में कवि नरंजन सिंह गिल और जसविंदर कौर जस्सी ने अपनी काव्य रचनाएं प्रस्तुत करके उपस्थित लोगों को प्रेरित किया। कार्यक्रम का संचालन कमल गिल ने किया, जो एक कुशल संचारक के रूप में जाने जाते हैं। इस अवसर पर प्रगतिशील लेखक संघ के कई प्रमुख सदस्य, जैसे जिला प्रधान भुपिंदर सिंह संधू और महासचिव धरविंदर सिंह औलख, अन्य गण्यमान्य व्यक्तित्वों के साथ उपस्थित थे।

इस संगोष्ठी ने साबित किया कि महिला अधिकारों की रक्षा और विकास के लिए समाज में जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है। यह कार्यक्रम न केवल महिलाओं की स्थिति को उजागर करता है, बल्कि यह एक प्रगति की ओर भी एक कदम है जिससे समाज में समानता और न्याय की स्थापना हो सके।

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