दिल्ली कूच का बड़ा फैसला आज: पंधेर की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामने आएगी रणनीति!
हरियाणा और पंजाब के किसान आज दिल्ली कूच के संबंध में महत्वपूर्ण फैसला लेने वाले हैं। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि इस मीटिंग में दूसरे फोरम के नेताओं से भी बातचीत की जाएगी, ताकि सभी को निर्णय के बारे में जानकारी मिल सके। अगली प्रेस कॉन्फ्रेंस अमृतसर में आयोजित की जाएगी, जिसमें आगे के कार्यक्रमों और अन्य संबंधित घोषणाओं की जानकारी दी जाएगी। किसानों ने रविवार को अपने-अपने समूहों के साथ चर्चा की और यह तय किया कि वे अपनी आगे की रणनीति पर विचार कर रहे हैं। शनिवार को चंडीगढ़ में किसानों और केंद्र सरकार के बीच छठी बैठक के बाद कोई निष्कर्ष नहीं निकला है, जिसे लेकर किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी पर अड़े हुए हैं। अगली बैठक 19 मार्च को होने वाली है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मीटिंग के बाद जानकारी दी कि बातचीत अच्छे माहौल में हुई और सभी पक्षों ने अपने-अपने आंकड़े प्रस्तुत किए। मंत्री ने कहा कि सरकार किसान संगठनों द्वारा पेश किए गए आंकड़ों का मूल्यांकन करेगी ताकि किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सके। किसान संगठनों ने विभिन्न फसलों की खरीद मात्रा और मूल्य के आंकड़े दिए, लेकिन ये आंकड़े सरकार की जानकारी से मेल नहीं खा रहे थे, जिस कारण मंत्री ने इन आंकड़ों के स्रोत को स्पष्ट करने की आवश्यकता बताई। इसके लिए विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों द्वारा आंकड़ों की जाँच की जाएगी।
किसान आंदोलन से जुड़ी कुछ प्रमुख बातें भी इस बीच सामने आई हैं। जैसे कि हाईकोर्ट ने शंभू बॉर्डर खोलने के आदेश दिए थे, लेकिन हरियाणा सरकार ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। वहीं, किसानों ने 6 दिसंबर को पहले दिल्ली कूच का निर्णय लिया था, लेकिन उन्हें रोकने के लिए हरियाणा पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी। किसानों के इस आंदोलन के खिलाफ कई बार पुलिस द्वारा बल प्रयोग किया गया, जिसने स्थिति को और भी तंग कर दिया है।
किसान नेता जगजीत डल्लेवाल भी अनशन पर बैठे हुए हैं, जो उनकी चिंताओं को और गंभीरता से उठाता है। उन्होंने 26 नवंबर 2024 को आमरण अनशन की घोषणा की थी, जिसके बाद पंजाब पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। हालांकि, उन्होंने अनशन जारी रखा, जिसे लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। विवादित मुद्दों पर स्थिति को सामान्य करने के लिए केंद्र सरकार ने बातचीत के लिए आमंत्रित किया है, लेकिन डल्लेवाल ने अपनी स्थिति नहीं बदली है।
भारतीय किसान आंदोलन की गतिविधियाँ लगातार जारी हैं, और किसानों का यह संघर्ष उनके अधिकारों और मांगों को लेकर है। किसान संगठन एकसाथ मिलकर अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं, जिसके संबंध में आज होने वाले निर्णय का सभी को इंतजार है।