ग्वालियरः कलेक्टर ने की राजस्व प्रकरणों के निराकरण की समीक्षा, अधिकारियों को दिए निर्देश
ग्वालियर, 11 अप्रैल । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में कलेक्टर रुचिका चौहान ने शनिवार को जिले के राजस्व अधिकारियों की बैठक लेकर राजस्व प्रकरणों के निराकरण की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि राजस्व प्रकरणों का निराकरण समय-सीमा में करना राजस्व अधिकारियों का प्रथम दायित्व है। शासन द्वारा राज्स प्रकरणों के निराकरण के लिये समय-सीमा निर्धारित की गई है। निर्धारित समय में प्रकरणों का निराकरण न करने वाले राजस्व अधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई की जायेगी।
कलेक्टर ने बैठक में राजस्व प्रकरणों के निराकरण के साथ-साथ सीएम हैल्पलाइन, शासकीय भूमि पर अतिक्रमण, फार्मर आईडी, राजस्व एवं वन विभाग के प्रकरणों की भी विस्तार से समीक्षा की। कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में राजस्व प्रकरणों के निराकरण के संबंध में आयोजित समीक्षा बैठक में अपर कलेक्टर कुमार सत्यम, एडीएम सीबी प्रसाद सहित जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, तहसीलदार, नायब तहसीलदार एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
कलेक्टर रुचिका चौहान ने समीक्षा के दौरान राजस्व अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जिले के शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्र में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के मामले में राजस्व अधिकारी तत्परता से कार्रवाई करें। कार्रवाई के दौरान संबंधित विभागीय अधिकारियों का भी सहयोग लें। शासकीय भूमि पर अतिक्रमण किसी भी स्थिति में नहीं होना चाहिए। अवैध कॉलोनी निर्माण के विरूद्ध भी राजस्व अधिकारी सजगता के साथ कार्रवाई करें। उन्होंने सभी राजस्व अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जो राजस्व अधिकारी शासकीय कार्य में लापरवाही बरतते हैं उनके विरूद्ध कार्रवाई के प्रस्ताव भी वरिष्ठ अधिकारियों को प्रस्तुत करें। शासकीय कार्य में लापरवाही पाए जाने पर किसी भी अधिकारी और कर्मचारी को बख्शा नहीं जायेगा।
कलेक्टर ने राजस्व वसूली की स्थिति की भी समीक्षा की और अधिकारियों से कहा कि लंबित राजस्व वसूली प्रकरणों में तेजी लाई जाए। साथ ही सीएम हेल्पलाइन में दर्ज राजस्व संबंधी शिकायतों का समय-सीमा में संतोषजनक निराकरण सुनिश्चित किया जाए। बैठक में नामांतरण, सीमांकन और बंटवारे के लंबित प्रकरणों की तहसीलवार समीक्षा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन प्रकरणों का निराकरण निर्धारित समय सीमा में पारदर्शिता के साथ किया जाए, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न हो। उन्होंने यह भी कहा कि राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता से निपटाने के लिए नियमित सुनवाई की जाए और प्रकरणों की प्रगति की सतत निगरानी रखी जाए।