होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्धपोत भेजने से ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने किया इनकार
लंदन, 16 मार्च । पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में बढ़ते तनाव काे लेकर ब्रिटेन ने वहां युद्धपोत भेजने से इनकार कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अतिरिक्त सैन्य मदद की मांग के बावजूद ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने यह कदम उठाया है, जिससे दोनों देशों के बीच मतभेद और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
रूस की सरकारी समाचार एजेंसी तास ने ब्रिटिश अखबार द डेली टेलीग्राफ के हवाले से कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा अतिरिक्त सैन्य मदद की मांग किए जाने के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने युद्धपोत भेजने से इनकार कर दिया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लंदन के इस रुख से स्टार्मर और ट्रंप के बीच चल रहा मतभेद और गहरा सकता है। इससे पहले ट्रंप ने नाराजगी जताई थी कि ब्रिटेन ने अमेरिका को ईरान पर पहले हमले के लिए अपने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी थी।
ट्रंप ने कहा था कि जो देश होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल प्राप्त करते हैं, उन्हें समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी हिस्सा लेना चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने ब्रिटेन, चीन, दक्षिण कोरिया, फ्रांस और जापान का जिक्र किया था।
इस बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के मेजर जनरल इब्राहिम जबारी ने चेतावनी दी थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य – जहां से दुनिया के कुल तेल निर्यात का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है – ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के कारण जहाजों की आवाजाही के लिए बंद किया जा सकता है।
हालांकि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि जलडमरूमध्य औपचारिक रूप से बंद नहीं है, लेकिन दोनों पक्षों के हमलों के डर से जहाज और तेल टैंकर इसे पार करने से बच रहे हैं।
इसी बीच सोमवार को ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्टार्मर ने स्पष्ट किया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की कोशिश उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटाे) का मिशन नहीं होगी। स्टार्मर ने पत्रकारों से कहा कि जलडमरूमध्य में सुरक्षित समुद्री आवाजाही बहाल करने के लिए यूरोप, खाड़ी देशों और अमेरिका के साथ मिलकर एक व्यापक गठबंधन बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हम होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए एक भरोसेमंद योजना बनाने पर काम कर रहे हैं, ताकि जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रूप से फिर शुरू हो सके। यह नाटो का मिशन नहीं होगा, बल्कि साझेदार देशों का एक गठबंधन होगा।
ट्रम्प ने कहा कि अगर सहयोगी होर्मुज़ जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में मदद नहीं करते हैं, तो यह “नाटो के भविष्य के लिए बहुत बुरा” होगा। इस पर नाटो ने कहा कि सहयोगियों ने भूमध्य सागर में अतिरिक्त सुरक्षा मुहैया कराने के लिए पहले ही कदम बढ़ा दिए हैं।
दूसरी ओर ब्रसेल्स में यूराेपीय यूनियन के विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने भी कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से निपटने में उन्हें नाटाे की कोई भूमिका नज़र नहीं आती। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि नाटाे ने इस दिशा में कोई फ़ैसला लिया है या वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य की ज़िम्मेदारी उठा सकता है।”
जोहान वाडेफुल ने कहा कि पश्चिम एशिया में हालात अस्थिर होने के बावजूद, यूक्रेन यूरोप की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बना हुआ है। उन्हाेंने कहा कि जब तेल और गैस की कीमतें बढ़ती हैं तो इससे रूस के युद्ध कोष को फ़ायदा पहुंचता है। वहीं, प्रतिबंधों में ढील देना एक गलत कदम होगा।
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