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अनूपपुर: टीईटी परीक्षा के विरोध में हजारों शिक्षकों ने पुनर्विचार याचिका की दायर करने की मांग

अनूपपुर, 13 मार्च । मध्य प्रदेश में शिक्षकों और सरकार के बीच एक बार फिर अनिवार्य शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर ठन गई है। शुक्रवार को संयुक्त मोर्चा शिक्षक संगठन अनूपपुर ने लोक शिक्षण संचालनालय के शिक्षक विरोधी आदेश के खिलाफ बिगुल फूंकते हुए मुख्यमंत्री के नाम अपर कलेक्टर दिलीप पाण्डेकय को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि राज्य सरकार सर्वोच्च न्यायालय में इस फैसले के विरुद्ध पुनर्विचार याचिका दायर करे और विवादित आदेश को तत्काल वापस ले।

शिक्षक संघ ने ज्ञापन में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी आदेश की भाषा से स्पष्ट है कि इसके लिए राज्य सरकार, मंत्रिमंडल या सचिवालय से कोई विधिवत सलाह या लिखित अनुमोदन नहीं लिया गया। यह शासन की स्थापित नीति के विरुद्ध है। शिक्षकों का तर्क है कि जिस सिविल अपील (1385/2025) का हवाला दिया जा रहा है, उसमें याचिकाकर्ता एक निजी संस्था है। ऐसे में एनसीटीई द्वारा मप्र के सरकारी शिक्षकों पर इसे थोपने का कोई स्पष्ट आधार नहीं है।

ज्ञापन में शिक्षकों ने अपनी सेवा शर्तों का हवाला देते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति शिक्षाकर्मी, संविदा शिक्षक और अध्यापक संवर्ग के तहत हुई थी। इसमें 1997-98 की नियुक्तियां शिक्षाकर्मी भर्ती नियमों में TET जैसी कोई शर्त नहीं थी, 2008 और 2018 के नियम में राज्य शिक्षा सेवा संवर्ग नियमों में भी कार्यरत शिक्षकों के लिए परीक्षा उत्तीर्ण करने का कोई उल्लेख नहीं था। शिक्षकों ने सर्वोच्च न्यायालय के ही एक पुराने आदेश (सिविल अपील 2634/2013) का जिक्र करते हुए कहा कि नियुक्ति के बाद किसी भी कर्मचारी की सेवा शर्तें नहीं बदली जा सकतीं। वहीं संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि इस आदेश से प्रदेश के करीब डेढ लाख शिक्षकों में डर और रोष का माहौल है। जो शिक्षक पिछले 27 वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, उन पर अचानक परीक्षा का दबाव बनाना उनके मानसिक और पेशेवर सम्मान के खिलाफ है। संगठन ने चेतावनी दी है कि सरकार इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर आदेश वापस ले, नहीं तो संघटन आगे की रणनीति तैयार करेंगी।

शिक्षकों ने अपनी नियुक्ति के समय के नियमों का हवाला देते हुए सेवा शर्तों में बदलाव को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि भर्ती नियम: 1997-98 की शिक्षाकर्मी भर्ती और उसके बाद के संविदा शिक्षक नियमों में TET की कोई शर्त नहीं थी।

पुराना न्यायिक आदेश: सर्वोच्च न्यायालय के एक पुराने आदेश (सिविल अपील 2634/2013) के अनुसार, नियुक्ति के बाद किसी भी कर्मचारी की सेवा शर्तों में ऐसा बदलाव नहीं किया जा सकता जो उनके हितों के विरुद्ध हो।

अनुभव की अनदेखी: जो शिक्षक पिछले 27 वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, उन पर अचानक परीक्षा का दबाव बनाना उनके मानसिक स्वास्थ्य और पेशेवर सम्मान के साथ खिलवाड़ है।

डेढ़ लाख शिक्षकों में भविष्य को लेकर डर

संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने बताया कि इस विवादित आदेश से प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों का भविष्य अधर में लटक गया है। शिक्षकों में व्याप्त डर और रोष को देखते हुए संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने तत्काल हस्तक्षेप कर आदेश को निरस्त नहीं किया, तो वे उग्र आंदोलन और आगामी रणनीति तैयार करने के लिए मजबूर होंगे।

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