अनूपपुर स्टेशन पर अव्यवस्थाएं: शौचालय बिना टॉयलेट, अधूरा फुटओवर ब्रिज यात्रियों के लिए बना मुसीबत
अनूपपुर, 12 मार्च । मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिला मुख्यालय के रेलवे स्टेशन पर जनसुविधाओं और नवीनीकरण के नाम पर निर्माण कार्य लगभग पिछले चार–पांच महीनों से जारी है, लेकिन इन कार्यों में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आ रही हैं, जिनसे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारों के अनुसार, रेलवे प्लेटफॉर्म पर बनाए जा रहे शौचालय और स्नानागार का निर्माण रेलवे के गतिशक्ति विभाग के तहत कराया जा रहा है। विभाग इसे “भुवनेश्वर स्टाइल” का शौचालय बता रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिस भवन पर शौचालय और स्नानागार लिखा है, उसके अंदर वास्तविक शौचालय की व्यवस्था ही नहीं दिखाई दे रही है।
रेलवन एप और स्टेशन के नाम में बड़ी गलती
निर्माण स्थल पर लगे बोर्ड में स्टेशन का नाम “अनूपपुर” की जगह “अन्नूपुर” लिखा हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे जैसी प्रतिष्ठित संस्था को सही हिन्दी भी लिखनी नहीं आती इस प्रकार की गलती होना बेहद गंभीर मामला है। इसी तरह रेलवन एप पर भी“अनूपपुर” की जगह “अन्नूपुर” लिखा दिखाई देता हैं।
लोगों का कहना है कि यदि स्टेशन के नाम के शब्द ही गलत लिख दी गई है तो यह विभागीय लापरवाही को दर्शाता है। बताया जा रहा है कि पिछले लगभग छह महीनों से यह गलती मौजूद है, लेकिन अब तक रेलवे के जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस पर नहीं पड़ी या इसे सुधारने की आवश्यकता नहीं समझी गई। स्थानीय लोगों के अनुसार इस गलती की कई बार शिकायत की गई, लेकिन ठेकेदार और रेलवे अधिकारियों द्वारा इसे सुधारने में कोई खास रुचि नहीं दिखाई जा रही है। लोगों ने स्वयं पहल कर ठेका एजेंसी को इसकी जानकारी दी और सुधार करने के लिए कहा, लेकिन सहयोग नहीं मिलने पर रेलवे अधिकारियों से भी संपर्क किया गया।
भुगतान लेकर निर्माण अधूरा रखने का आरोप
लोगों का कहना है कि यदि रेलवे की एजेंसी ने शौचालय का पूरा निर्माण किए बिना ही भुगतान ले लिया है, तो यह गंभीर मामला हो सकता है। इस पर जांच की आवश्यकता है, क्योंकि यह भ्रष्टाचार या लापरवाही की श्रेणी में आ सकता है।
अधूरा फुटओवर ब्रिज, पटरियां पार करने को मजबूर यात्री
स्टेशन पर फुटओवर ब्रिज का निर्माण भी अभी अधूरा है, जिसके कारण यात्रियों को एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म तक जाने के लिए पटरियां पार करने का जोखिम उठाना पड़ रहा है।
अनूपपुर से उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और भोपाल की ओर जाने वाली अधिकांश ट्रेनें रात के समय संचालित होती हैं। अंबिकापुर से आने वाली मेमू ट्रेन अक्सर दो से तीन घंटे तक लेट हो जाती है। ऐसे में यात्री अपनी अगली ट्रेन पकड़ने की जल्दी में प्लेटफॉर्म 1 के अंतिम छोर पर बने फुटओवर ब्रिज तक जाने के बजाय सीधे प्लेटफॉर्म 2 से पटरियां पार कर प्लेटफॉर्म 3 और 4 की ओर भागते हुए दिखाई देते हैं।
आरपीएफ के लिए भी चुनौती
रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। वे यात्रियों को पटरियां पार करने से रोकना चाहते हैं ताकि कोई दुर्घटना न हो, लेकिन ट्रेन लेट होने और कुलियों की कमी के कारण यात्रियों को मजबूरी में ऐसा करना पड़ता है।
स्टेशन परिसर के बाहर भी गंदगी की समस्या
स्टेशन से बाहर निकलते ही बदबू और गंदगी की समस्या भी सामने आती है। स्टेशन परिसर के बाहर शौचालय और मूत्रालय की व्यवस्था नहीं होने के कारण कई लोग खुले में पेशाब करने को मजबूर हो जाते हैं, जिससे वातावरण अस्वच्छ हो जाता है। सूत्रों के अनुसार इस समस्या के समाधान के लिए प्लेटफॉर्म पर मौजूद पे एंड यूज शौचालय को स्टेशन के बाहर की सड़क से जोड़ने का प्रस्ताव बनाया गया था, लेकिन आपत्तियों के बाद उच्च अधिकारियों ने इस प्रस्ताव पर रोक लगा दी।
हालांकि सवाल यह उठता है कि क्या यह समस्या का स्थायी समाधान होगा या केवल समस्या को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने जैसा होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर होगा कि रेलवे प्रशासन स्टेशन परिसर में ही पर्याप्त शौचालय और मूत्रालय की व्यवस्था करे, ताकि यात्रियों को सुविधा मिले और परिसर स्वच्छ बना रहे।
इस संबंध में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर मंडल के जनसंपर्क अधिकारी अंबिकेश साहू का कहना है कि स्टेशन के नाम लिखने में त्रुटि हुई है जिसे जल्द ही सुधर जाएगा, अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत कर चल रहा है इसके बाद अनूपपुर स्टेशन का कार्यकाल हो जाएगा और यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी।