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आदेश के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं, लगता है डीजीपी दे रहे संरक्षण-हाईकोर्ट

जयपुर, 11 मार्च । राजस्थान हाईकोर्ट ने एनडीपीएस से जुडे मामले में अदालती आदेश के बावजूद कानोता थानाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने की जानकारी नहीं देने पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि डीजीपी को जांच के लिए आदेश भेजते हुए दो माह में कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने को कहा था, लेकिन पेश की गई रिपोर्ट से लगता है कि थानाधिकारी के कृत्य को प्रदेश के उच्चतम पुलिस अधिकारी की ओर से संरक्षित किया जा रहा है। अदालत ने कहा कि जब पुलिस अधिकारी को ऐसा सुरक्षा कवच प्रदान किया जाता है तो हम यह मानते हैं कि पुलिस स्टेशन लोगों की सुरक्षा और कल्याण के लिए नहीं है। इसलिए कोई महिला रात के समय छेडछाड या दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराने थाने नहीं जाती है। इसके साथ ही अदालत ने डीजीपी को 16 मार्च को यह बताने को कहा है कि मामले में कार्रवाई क्यों नहीं की गई। जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने यह आदेश किशन सांसी की ओर से दायर द्वितीय जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि कानोता थाने के तत्कालीन थानाधिकारी डॉ. गौतम ने 2 मार्च, 2024 को एनडीपीएस की कार्रवाई करते हुए जीतू लाल योगी के कब्जे से जब्ती की कार्रवाई की थी और मामला दर्ज किया था। इस दौरान बनाए मेमो के अनुसार जब्ती की सील को नष्ट कर दिया गया था। वहीं इसी दिन दर्ज एनडीपीएस की दूसरी एफआईआर में भी थानाधिकारी ने जब्ती के दौरान पुरानी सील का प्रयोग किया, जबकि एनडीपीएस एक्ट के तहत सील का एक प्रकरण में ही उपयोग हो सकता है। इस पर अदालत ने पूर्व में आदेश जारी कर डीजीपी को कार्रवाई कर रिपोर्ट पेश करने को कहा था, लेकिन पेश की गई रिपोर्ट को देखने से लगता है कि मामले में थानाधिकारी को बचाया जा रहा है। वहीं याचिकाकर्ता के अधिवक्ता टीएल पांडे ने कहा कि एनडीपीएस एक्ट में स्पष्ट प्रावधान है कि जब्ती के बाद सील को नष्ट कर दिया जाएगा तो याचिकाकर्ता के प्रकरण में पहले से काम में ली गई सील कैसे उपयोग ली गई।

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