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हाईटेक हुई जयपुर की होली: बाजारों में मिसाइल और एके-47 पिचकारियों की धूम

जयपुर, 02 मार्च । शाही और परंपरागत होली के लिए दुनिया भर में मशहूर जयपुर में होलिका दहन और धुलंडी मनाई जाएगी। इससे पहले ही राजधानी के बाजारों में रंगों का मेला सज गया है। चौड़ा रास्ता, त्रिपोलिया बाजार, चांदपोल बाजार और छोटी चौपड़ में कदम रखते ही हर ओर गुलाल की खुशबू, रंग-बिरंगी पिचकारियां और बच्चों की चहल-पहल नजर आ रही है।

इस बार जयपुर की होली पारंपरिक रंगों से आगे बढ़कर हाईटेक अंदाज में नजर आ रही है। गुलाल गोटों से लेकर अत्याधुनिक मॉडल पिचकारियों तक बाजार में नई रौनक है। जयपुर की पहचान रहे लाख से बने गुलाल गोटे आज भी उपलब्ध हैं, जो शाही दौर की याद दिलाते हैं। कहा जाता है कि राजपरिवार के समय से इनका उपयोग होली में होता रहा है।

त्रिपोलिया बाजार के रंग व्यापारी मोहम्मद आरिफ ने बताया कि पहले की होली सादगी और प्राकृतिक रंगों के साथ खेली जाती थी, लेकिन अब समय के साथ अंदाज बदल गया है। बाजार में इस बार हवा में रंग छोड़ने वाले गैस सिलेंडर जैसे उपकरण आए हैं, जो आग बुझाने वाले यंत्र की तरह दिखते हैं। 2, 4 और 6 किलो क्षमता वाले ये सिलेंडर सुबह से शाम तक चलने का दावा किया जा रहा है। उनकी पांच पीढ़ियां जयपुर में होली पर रंग बेचने का काम कर रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में स्प्रे कलर, स्नो स्प्रे और आधुनिक हथियारों के मॉडल वाली पिचकारियों की मांग तेजी से बढ़ी है। बच्चों और युवाओं में इनका खासा क्रेज है। बाजार में अलग-अलग मास्क भी उपलब्ध हैं, जिन्हें पहनकर युवा होली का आनंद लेते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि इस बार बाजार में ऑपरेशन सिंदूर की मिसाइल, एके-47 जैसी बंदूक, हनुमान जी की गदा, तलवार और शिवजी का त्रिशूल मॉडल पिचकारियां भी उपलब्ध हैं। दुकानदारों का कहना है कि 2 और 3 मार्च को बाजार में और अधिक रौनक देखने को मिलेगी। एक ओर जहां बुजुर्ग आज भी सादगी और प्राकृतिक रंगों वाली होली को बेहतर मानते हैं, वहीं नई पीढ़ी हाईटेक पिचकारियों और नए प्रयोगों को पसंद कर रही है। बदलते दौर में होली का रंग-रूप भले बदला हो, लेकिन प्रेम, भाईचारा और उल्लास का संदेश आज भी वैसा ही बना हुआ है।

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