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Himachal Pradesh

एसओएस परीक्षाओं के लिए 16 अप्रैल से ऑनलाइन आवेदन

धर्मशाला, 28 मार्च । हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने राज्य मुक्त विद्यालय (एसओएस) के तहत सितंबर 2026 सत्र की परीक्षाओं की तैयारी पूरी कर ली हैं। बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि 8वीं, 10वीं और 12वीं के लिए ऑनलाइन पंजीकरण और प्रवेश फॉर्म भरने की प्रक्रिया 16 अप्रैल 2026 से शुरू होगी। इच्छुक उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने नजदीकी एसओएस अध्ययन केंद्रों पर जाकर पंजीकरण की औपचारिकताएं पूरी करें।

बोर्ड ने आवेदन के लिए तीन चरणों में समय सारणी निर्धारित की है। बिना किसी विलंब शुल्क के छात्र 16 अप्रैल से 18 मई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद, 19 मई से 19 जून तक आवेदन करने पर 1000 रुपये का विलंब शुल्क देय होगा। यदि कोई छात्र इस अवधि में भी चूक जाता है, तो उसे 20 जून से 13 जुलाई 2026 के बीच 2000 रुपये के भारी विलंब शुल्क के साथ अंतिम अवसर दिया जाएगा। विशेष रूप से, ‘विशेष अंक सुधार परीक्षा’ के लिए आवेदन केवल अंतिम चरण में ही स्वीकार किए जाएंगे।

विभिन्न श्रेणियों के लिए बोर्ड ने स्पष्ट शुल्क निर्धारित किया है। कक्षा 8वीं के लिए फ्रेश एडमिशन शुल्क 2400 रुपये, 10वीं के लिए 3000 रुपये और 12वीं के लिए 2900 रुपये तय किया गया है। वहीं, री-अपीयर (एक या पूर्ण विषय) के लिए 8वीं और 12वीं में 800 रुपये, जबकि 10वीं के लिए 1000 रुपये शुल्क होगा। बोर्ड सचिव डॉ. (मेजर) विशाल शर्मा ने स्पष्ट किया है कि मार्च 2026 के नतीजों के बाद री-अपीयर और सुधार परीक्षाओं का विस्तृत शेड्यूल अलग से जारी किया जाएगा, इसलिए छात्रों को आगामी आधिकारिक सूचना का इंतजार करना चाहिए।

विशेष अंक सुधार परीक्षा के लिए अलग दरें

अंकों में सुधार की इच्छा रखने वाले छात्रों के लिए शुल्क प्रयासों की संख्या पर निर्भर करेगा। प्रथम प्रयास के लिए थ्योरी पेपर की फीस 1500 रुपये प्रति विषय होगी, जबकि दूसरे प्रयास के लिए यह 2000 रुपये और तीसरे प्रयास के लिए 2500 रुपये प्रति विषय तक जाएगी। प्रैक्टिकल विषयों के लिए भी शुल्क 250 रुपये से लेकर 450 रुपये तक अलग-अलग चरणों में निर्धारित है।

अध्ययन केंद्रों को लापरवाही न बरतने की सख्त चेतावनी

बोर्ड ने उन अध्ययन केंद्रों को कड़े निर्देश दिए हैं जो बार-बार गलत ऑनलाइन फॉर्म सबमिट कर रहे हैं। बोर्ड के अनुसार, इस लापरवाही से छात्रों को अनावश्यक मानसिक और शारीरिक परेशानी झेलनी पड़ती है और उन्हें सुधार के लिए बोर्ड कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। सभी केंद्रों को निर्देश दिया गया है कि वे संशोधित नियमों और अपडेटेड प्रॉस्पेक्टस का कड़ाई से पालन करें और आधिकारिक घोषणा से पहले किसी भी प्रकार की प्रक्रिया शुरू न करें।

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