हिमाचल आर्थिक आपातकाल की ओर, सरकार के हाथ खड़े : विपिन परमार
धर्मशाला, 09 फ़रवरी । हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही जिस सुधार और गारंटियों का ढोल पीटा था, आज उसी सरकार की पोल खुद उसके वित्त विभाग की प्रेजेंटेशन ने खोल दी है। यह कोई विपक्ष का राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि कांग्रेस सरकार के आर्थिक दिवालियापन की आधिकारिक स्वीकारोक्ति है। प्रदेश को सुनियोजित तरीके से आर्थिक गर्त में धकेलने का यह सबसे ठोस और खतरनाक दस्तावेज़ है। यह बात विधायक एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने सोमवार को जारी एक बयान में कही।
उन्होंने कहा कि वित्त विभाग की इस प्रेजेंटेशन ने साफ कर दिया है कि हिमाचल अब केवल संकट में नहीं, बल्कि वित्तीय अराजकता और आर्थिक आपातकाल जैसे हालात की ओर बढ़ रहा है। हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि सरकार अपने ही कर्मचारियों, पेंशनरों और जनता से किए गए वादों को निभाने की स्थिति में नहीं रही। सरकार खुद कबूल कर रही है। उन्होंने कहा कि हालात यह हो गए हैं कि कर्मचारियों का डीए और एरियर सहित अन्य कोई भी वित्तिय लाभ सरकार नही दे सकती है।
आरडीजी खत्म, कांग्रेस के झूठ और भ्रम की राजनीति का अंत
कांग्रेस सरकार महीनों तक आरडीजी को लेकर केंद्र सरकार पर बेबुनियाद आरोप लगाती रही, लेकिन अब उसी सरकार के वित्त विभाग ने यह स्वीकार कर लिया है कि आरडीजी समाप्त हो चुका है। तमाम विकासात्मक परियोजनाएं लगभग बंद करने के बावजूद आगामी वित्त वर्ष में भी 6,000 करोड़ का घाटा तय है। यह घाटा किसी प्राकृतिक आपदा का नहीं, बल्कि अयोग्य शासन, गैर-जिम्मेदार फैसलों और झूठी गारंटियों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यदि यही हालात रहे, तो आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश को गंभीर सामाजिक असंतोष कर्मचारियों-पेंशनरों का उबाल विकास में दशकों का नुकसान निवेश और रोजगार पर गहरा आघात और राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की साख के पतन का सामना करना पड़ेगा।
परमार ने कहा कि वित्त विभाग की यह प्रेजेंटेशन कांग्रेस सरकार के खिलाफ सरकारी चार्जशीट है। यह साबित करती है कि वर्तमान सरकार न तो शासन चला पाने में सक्षम है और न ही हिमाचल प्रदेश के भविष्य को सुरक्षित रखने में। कांग्रेस सरकार ने हिमाचल प्रदेश का बेड़ा गर्क कर दिया है। प्रदेश की जनता अब सब कुछ देख रही है और आने वाले समय में इस आर्थिक तबाही का पूरा हिसाब कांग्रेस को देना होगा।