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Uttarakhand

चयन प्रक्रिया में आरक्षण का दावा न करने पर लाभ नहीं मिलेगा : हाईकोर्ट

नैनीताल, 27 फ़रवरी । उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया के दौरान आरक्षण का दावा नहीं करता है तो बाद में वह इसके लाभ से वंचित होने की शिकायत नहीं कर सकता। उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने सहायक शिक्षक प्राथमिक विज्ञान भर्ती से संबंधित एक याचिका को खारिज करते हुए कहा कि आवेदन के स्तर पर आरक्षण का दावा न किया जाना बाद में अमान्य माना जाएगा।

प्रकरण में याचिकाकर्ता ने चंपावत जनपद में चयनित एक अभ्यर्थी की नियुक्ति को चुनौती देते हुए 28 जनवरी 2026 को प्रकाशित चयन सूची निरस्त करने तथा स्वयं को राज्य आंदोलनकारी कोटे का लाभ न देने का जिक्र करते हुए कोटे का लाभ देने का अनुरोध करते हुए नियुक्त करने की मांग की थी। उसका तर्क था कि चयनित अभ्यर्थी को उससे कम अंक प्राप्त हुए थे। राज्य सरकार ने न्यायालय को अवगत कराया कि भर्ती विज्ञापन में सरकारी आदेशों के अनुसार क्षैतिज आरक्षण लागू होने का स्पष्ट उल्लेख था, और चयनित अभ्यर्थी को राज्य आंदोलनकारी कोटे के अंतर्गत 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का लाभ दिया गया है।

न्यायालय ने कहा कि आरक्षित श्रेणी में नियुक्त अभ्यर्थी की तुलना सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थी से नहीं की जा सकती। चूंकि याचिकाकर्ता ने आवेदन के समय स्वयं को राज्य आंदोलनकारी श्रेणी में दर्शाते हुए लाभ का दावा नहीं किया था, इसलिए बाद में उसका यह दावा स्वीकार्य नहीं है। न्यायालय ने माना कि चयन प्रक्रिया नियमों के अनुरूप हुई है और उसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता है।

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