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फाइलेरिया बीमारी से 6.44 लाख लोगों को मिलेगी सुरक्षा : डॉ. अरुण कुमार

प्रयागराज, 07 फ़रवरी ।फाइलेरिया उन्मूलन में मीडिया की भूमिका अहम है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में बहादुरपुर और उरुआ ब्लॉकों में 10 फरवरी से फाइलेरिया बचाव की दवा खिलाई जाएगी। यह जानकारी शनिवार को मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ अरुण कुमार ने दी।

उन्होंने कहा कि जिला तेजी से फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। नतीजन इस बार राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत 10 से 28 फरवरी तक केवल बहादुरपुर और उरुआ ब्लॉकों में सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए 87 सुपरवाइजर व 516 स्वास्थ्य टीमें गठित की गई हैं, जो घर-घर जाकर अपने सामने लगभग 6.44 लाख लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाएंगी। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों से लगातार चले अभियानों की वजह से अब अधिकांश ब्लॉक संक्रमण से मुक्त हो चुके हैं। हाल में हुए नाइट ब्लड सर्वे में जनपद के 21 ब्लॉकों में से केवल बहादुरपुर और उरुआ में ही सूक्ष्म कृमियों की दर अधिक पाई गई है।

उन्होंने बताया कि अभियान में स्वास्थ्य विभाग के साथ पंचायती राज, शिक्षा, बाल विकास, सूचना समेत अन्य विभागों को भी जोड़ा गया है। अभियान की शुरुआत ग्राम पंचायतों में जनप्रतिनिधि स्वयं दवा सेवन करेंगे। दवा खाली पेट नहीं लेनी है और दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं व गंभीर रोगियों को छोड़कर सभी को इसका सेवन करना है

एसीएमओ व वीबीडी नोडल डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि जनपद में वर्तमान में हाथीपांव के 1,590 और हाइड्रोसील के 283 मरीज पंजीकृत हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सर्वजन दवा सेवन, रोग प्रबंधन, वाहक नियंत्रण, विभागीय समन्वय और डिजिटल नवाचार पर आधारित पांच-स्तंभीय रणनीति से काम कर रही है।

जिला मलेरिया अधिकारी आनंद सिंह ने बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन में अब मरीजों की भागीदारी भी जोड़ी गई है। सीफार के सहयोग से जनपद के पांच ब्लॉकों में सीएचओ के नेतृत्व में 30 पीएसपी (पेशेंट स्टेकहोल्डर प्लेटफॉर्म) बनाए गए हैं, जिनमें 560 सदस्य सक्रिय हैं। इनमें फाइलेरिया मरीज, ग्राम प्रधान, कोटेदार, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, समूह सखी और शिक्षक शामिल हैं, जो गांवों में जाकर लोगों को दवा सेवन के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

एमएलएन मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. एम.ए. हसन ने बताया कि फाइलेरिया से बचाव की दवाएं डब्ल्यूएचओ से प्रमाणित और सुरक्षित हैं। दवा सेवन के बाद हल्का बुखार या चक्कर आना सामान्य प्रक्रिया है जो फाइलेरिया के सूक्ष्म कृमियों के नष्ट होने से होता है। इसलिए यह शुभ संकेत है। असली खतरा दवा न लेना है, क्योंकि एक संक्रमित व्यक्ति पूरे गांव को जोखिम में डाल सकता है।

क्या है फाइलेरिया

फाइलेरिया मच्छरों से फैलने वाली एक गंभीर बीमारी है, इसके लक्षण वर्षों बाद हाथीपांव और हाइड्रोसील के रूप में सामने आते हैं। हाइड्रोसील का ऑपरेशन संभव है, लेकिन हाथीपांव का इलाज नहीं है। बचाव का सबसे प्रभावी तरीका एमडीए अभियान के तहत दवा सेवन है।

इस मौके पर डबल्यूएचओ, पाथ, पीसीआई व सीफार के प्रतिनिधि सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।

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