टेरर फंडिंगः सुप्रीम कोर्ट ने शब्बीर शाह के 1990 के भड़काऊ भाषण मामले में एनआईए पर उठाए सवाल
नई दिल्ली, 25 फ़रवरी । उच्चतम न्यायालय ने टेरर फंडिंग के मामले में जेल में बंद अलगाववादी नेता शब्बीर शाह की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से शब्बीर के 1990 के भड़काऊ भाषणों को आधार बनाने पर सवाल खड़े किए हैं। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने एनआईए से कहा कि आपने इन भाषणों को 2019 में निकाला और अब कह रहे हैं कि वे भड़काऊ हैं।
दरअसल, एनआईए के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने अपनी दलीलों में शब्बीर शाह के भाषणों के ट्रांसक्रिप्ट और वीडियो का जिक्र किया। इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने पूछा कि वो भाषण कब के हैं। तब लूथरा ने कहा कि वे 1990 के हैं। तब कोर्ट ने कहा कि ये कोई नया भाषण नहीं है, ये 30-35 साल पुराने हैं।
कोर्ट ने 04 सितंबर 2025 को शब्बीर शाह को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि आरोपित के खिलाफ गंभीर आरोप हैं। उच्चतम न्यायालय ने एनआईए को नोटिस जारी किया था। शब्बीर शाह के वकील कॉलिन गोंजाल्वेस ने कहा कि याचिकाकर्ता गंभीर रुप से बीमार है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 12 जून 2025 को शब्बीर शाह की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। सुनवाई के दौरान शब्बीर शाह के वकील कॉलिन गोंजाल्वेस ने कहा था कि इस मामले में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और जांच पूरी हो चुकी है। एनआईए की ओर से दाखिल पहली पूरक चार्जशीट में शब्बीर शाह के नाम का जिक्र भी नहीं है। इस मामले में जल्द ट्रायल पूरी होने की उम्मीद नहीं है क्योंकि इस मामले में 400 गवाह हैं।
शब्बीर शाह फिलहाल तिहाड़ जेल में दो मामलों में जेल में बंद है। एक मामला टेरर फंडिंग का है और दूसरा मनी लांड्रिंग का है। शब्बीर के खिलाफ 2005 के मनी लांड्रिंग केस में 2007 में केस दर्ज किया गया था। शब्बीर को 25 जुलाई 2017 को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था।