सरिस्का साहित्य संवाद 2026: पहले दिन वैचारिक मंथन और पुस्तकों के विमोचन से सजा साहित्यिक मंच
अलवर, 16 फरवरी । शहर के रिवाज रिसॉर्ट में आयोजित दो दिवसीय साहित्यिक महोत्सव सरिस्का साहित्य संवाद 2026 का पहला दिन गरिमामय और वैचारिक ऊर्जा से भरपूर वातावरण में सम्पन्न हुआ। उद्घाटन सत्र के साथ “शतकीय राष्ट्र साधना संवाद” विषय पर विशेष परिचर्चा ने आयोजन को गंभीर वैचारिक दिशा प्रदान की।
प्रथम सत्र में हिरेन जोशी ने राष्ट्र साधना के शतकीय परिप्रेक्ष्य पर सारगर्भित विचार रखे। इस अवसर पर प्रसिद्ध यूट्यूबर शिक्षक एवं पूर्व प्रशासनिक अधिकारी अंकित अवस्थी तथा शिक्षाविद् डॉ. मोनिका रस्तोगी ने राष्ट्रनिर्माण में बौद्धिक समाज की भूमिका, शिक्षा की जिम्मेदारी और समकालीन चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि वैचारिक जागरूकता ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला है।
द्वितीय सत्र “वंदे मातरम् के 150 वर्ष” विषय पर केंद्रित रहा। इसमें श्री वर्धन एवं राष्ट्रकवि विनीत चौहान ने ‘वंदे मातरम्’ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सांस्कृतिक महत्व और वर्तमान संदर्भ में उसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की। श्रोताओं ने राष्ट्रीय चेतना से ओतप्रोत प्रस्तुति को सराहा।
तृतीय सत्र “मीडिया, साहित्य और समाज” विषय पर आयोजित हुआ, जिसमें IANS राजस्थान की हेड अर्चना शर्मा, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर निखिलेश शांडिल्य तथा दिल्ली विश्वविद्यालय की प्राध्यापिका रजनी मान ने भाग लिया। वक्ताओं ने पारंपरिक और डिजिटल मीडिया की सामाजिक जिम्मेदारी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा साहित्य के साथ उसके अंतर्संबंधों पर गंभीर मंथन किया।
प्रथम दिवस पर तीन महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन और परिचर्चा भी आयोजित हुई। लेखकों ने अपनी कृतियों की सृजन-प्रक्रिया और विषय-वस्तु पर प्रकाश डाला, जिससे साहित्य प्रेमियों को रचनात्मक प्रक्रिया की गहन समझ मिली।
कार्यक्रम में साहित्य प्रेमियों, युवाओं, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। आगामी दिवस आयोजित होने वाली “सरिस्का वॉक” को लेकर प्रतिभागियों में विशेष उत्सुकता है। आयोजन का पहला दिन सफलतापूर्वक सम्पन्न होने के साथ दूसरे दिन के कार्यक्रमों को लेकर सकारात्मक ऊर्जा बनी हुई है।