हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर कहा, बच्चा अगर मां और जैविक पिता के साथ है तो यह अवैध हिरासत नहीं
जयपुर, 25 फ़रवरी । राजस्थान उच्च न्यायालय ने बच्चे की अवैध हिरासत से जुडे मामले में दायर याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि अगर बच्चा अपनी मां और जैविक पिता के साथ है और याचिकाकर्ता स्वयं मान रहा है कि बच्चा उसका नहीं है तो फिर यह अवैध हिरासत का मामला नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता पर पचास हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया है। जस्टिस महेन्द्र गोयल और जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने यह आदेश अलवर निवासी व्यक्ति की याचिका को खारिज करते हुए दिए।
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता पति ने स्वयं निचली अदालत में प्रार्थना पत्र पेश कर यह माना था कि उसकी पत्नी मई, 2024 से अपनी बहन और जीजा के साथ रह रही है। वहीं पति ने जीजा के साथ अवैध संबंध होने का आरोप लगाते हुए कहा था कि पत्नी ने अवैध संबंध को लेकर अपनी पहचान छिपाते हुए अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया है। ऐसे में पति खुद मान रहा है कि वह उसका जैविक पिता नहीं है। इस प्रार्थना पत्र को अलवर की कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रकाश ठाकुरिया ने बताया कि पुलिस ने अपनी पहली रिपोर्ट में महिला के किसी भी बच्चे को जन्म देने से इनकार किया है, लेकिन पड़ोसियों ने बच्चा पैदा होने की बात कही है। वहीं निचली अदालत की ओर से पुलिस को साक्ष्य पेश करने के निर्देश देने पर पुलिस ने दूसरी रिपोर्ट में माना की याचिकाकर्ता की पत्नी ने दूसरे नाम से अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया है, लेकिन पत्नी कह रही है कि उसने किसी बच्चे को जन्म नहीं दिया। ऐसे में फिर अस्पताल रिकॉर्ड में पैदा हुआ बच्चा कहां गया। इसलिए आशंका है कि बच्चे की जिंदगी खतरे में है। ऐसे में राज्य सरकार के संरक्षक होने के चलते बच्चे को बरामद किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने याचिका को खारिज कर दिया।