बोत्स्वाना से आज मप्र आएंगे आठ चीता, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव कूनों में करेंगे रिलीज
भोपाल, 28 फरवरी । बोत्सवाना से आठ चीतों की खेप आज मध्य प्रदेश आ रही है। केंद्रीय वनमंत्री भूपेन्द्र यादव इन चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान के बाड़े में रिलीज करेंगे। इसके साथ ही भारत में चीतों की संख्या 39 से बढ़कर 47 हो जाएगी।
जनसम्पर्क अधिकारी केके जोशी ने बताया कि चीता प्रजोक्ट के तहत श्योपुर जिले के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में अफ्रीकी महाद्वीप से चीतों का तीसरा बड़ा जत्था पहुंचने वाला है। बोत्स्वाना से एयरलिफ्ट किए गए आठ चीते (6 मादा और 2 नर) विशेष विमान से आज मध्य प्रदेश लाए जा रहे हैं। कूनो एक बार फिर इतिहास रचने को तैयार है। अफ्रीका की धरती से आए फर्राटेदार धावक अब कूनों के जंगलों में वन पारिस्थितिकी को समृद्ध करेंगे।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार केन्द्रीयमंत्री यादव सुबह नई दिल्ली से विशेष विमान से रवाना होकर ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया एयरपोर्ट पहुंचेगे। यहां से हेलिकॉप्टर द्वारा कूनो नेशनल पार्क के लिए प्रस्थान करेंगे और सुबह करीब 10 बजे यहां बोत्सवाना से लाए जा रहे चीतों को कूनो पार्क मे छोड़ेंगे। इसके बाद वन मंत्री ग्वालियर के लिए प्रस्थान करेंगे।
ट्रांसलोकेशन की विस्तृत कार्ययोजना
बोत्स्वाना से चीतों की सुरक्षित अनलोडिंग इमिग्रेशन, कस्टम, पशु-चिकित्सा एवं सुरक्षा औपचारिकताएं पूर्ण किए जाने के बाद आज सुबह 8:30 बजे ग्वालियर से भारतीय वायुसेना के दो हेलीकॉप्टरों से चीतों को कूनो नेशनल पार्क के लिए रवाना किया जाएगा। चीते प्रातः 9:30 बजे कूनो नेशनल पार्क पहुंचेंगे। उनकी सुरक्षित लैंडिंग के लिए पार्क में पांच हेलीपैड बनाये गये हैं। पूरा अभियान अत्यंत सावधानी और वैज्ञानिक प्रोटोकॉल के तहत संपन्न किया जाएगा। पार्क में बाड़े तैयार किए गए हैं, जहां चीते लगभग एक महीने तक क्वारंटाइन में रहेंगे।
मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमा पर स्थित श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 17 सितंबर, 2022 को कूनो नेशनल पार्क में चीता प्रोजेक्ट की शुरूआत की गई थी। यह प्रोजेक्ट सफलता की ओर आगे बढ रहा है। वर्तमान में भारत में चीतों की संख्या 39 है, बोत्सवाना से 8 चीते आने के साथ ही इनकी संख्या 47 हो जाएगी। कूनो नेशनल पार्क में चीतों की पुर्नबसाहट के लिए शुरू किये गये चीतो प्रोजेक्ट को साढे तीन साल के लगभग हो गये है। कूनों का जंगल चीतो के प्रजनन के लिए सकारात्मक रहा है।
अरावली पर्वत शृंखला की सुरम्य पहाडियों से घिरा कूनो नेशनल पार्क अपनी प्राकृतिक मनोहारी छंटा बिखेरते हुए नये मेहमानों के स्वागत के लिए पूरी तरह से तैयार है। प्राकृतिक संपदाओं से भरपूर कूनो नेशनल पार्क के आगोश में बहने वाली कूनो नदी इसे न केवल ओर भी अधिक खूबसूरत बना देती है, बल्कि इसके सपाट और चौडे़ तटो पर खिली हुई धूप में अठखेलियां करते मगरमच्छ यहां आने वाले लोगों को रोमांचित कर देते है।
कूनो नेशनल पार्क में विभिन्न प्रकार के 174 पक्षियों की प्रजातियां मौजूद हैं, वहीं सैकड़ों प्रजातियां वन्य जीवों की है। पक्षियों की 12 प्रजाति तो दुलर्भ श्रेणी में मानी गई हैं। वर्ष 1952 में भारत में एशियाई चीतों के विलुप्त होने के बाद से भारत में चीतो को फिर से स्थापित करने की योजना चल रही थी। इसी उद्देश्य के लिए सिंतबर 2009 में राजस्थान के गजनेर में चीता विशेषज्ञों की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें चीता संरक्षण कोष के डॉ लोरी मार्कर, स्टीफन जेओ ब्रायन एवं अन्य चीता विशेषज्ञो ने दक्षिण अफ्रीकी चीता को भारत लाने सिफारिश की थी।
पर्यावरण और वन मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली के निर्देश पर वर्ष 2010 में भारतीय वन्य जीव संस्थान (वाईल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट) ने भारत में चीता पुनर्स्थापना के लिए संभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया, जिसमें 10 स्थलों के सर्वेक्षण में मध्यप्रदेश के नौरादेही अभ्यारण, कूनो पालपुर अभ्यारण एवं राजस्थान के शाहगढ़ को उपयुक्त पाया गया, इन तीनो में से भी कूनो अभ्यारण्य जो वर्तमान में कूनो राष्ट्रीय उद्यान है, सर्वाधिक उपयुक्त पाया गया।
भारत में चीतों को बसाने के लिए कूनो नेशनल पार्क में निर्धारित प्रोटोकॉल और गाइडलाइन के अनुसार कार्य किया जा रहा है। परियोजना के एकीकृत प्रबंधन में कूनो के राष्ट्रीय उद्यान के 750 वर्ग किलोमीटर में चीतों के रहवास के लिए उपयुक्तता है। इसके अतिरिक्त करीब 3 हजार वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र दो जिलों श्योपुर और शिवपुरी में चीतों के स्वंच्छद वितरण के लिए उपयुक्त हैं।
कूनो राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र से लगे हुए ग्रामों के लोगों को चीता मित्र बनाया गया है। यहाँ चीतों के रहवास के लिए अनुकूल परिस्थितियों का विकास किया गया है। पानी की व्यवस्था के साथ आवश्यक सिविल कार्य भी पूरे किए गए हैं। कूनो में शिकार का घनत्व चीतों के लिए पर्याप्त है।
भारत में चीतों की वर्तमान स्थिति
‘प्रोजेक्ट चीता’ अब अपने प्रारंभिक चरण से आगे बढ़कर स्थायी स्थापना और सफल प्रजनन के चरण में प्रवेश कर चुका है। दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 12 चीतों में से 8 वर्तमान में कूनो में पूर्णतः स्थापित और स्वस्थ हैं। इनमें से तीन चीतों को गांधी सागर अभयारण्य में सफलतापूर्वक स्थानांतरित किया गया है। दक्षिण अफ्रीकी माताओं से जन्मे 10 शावक जीवित और स्वस्थ हैं। भारत में जन्मी पहली वयस्क मादा चीता ‘मुखी’ ने पांच शावकों को जन्म दिया है, जो इस परियोजना की ऐतिहासिक उपलब्धि है। ‘गामिनी’ दूसरी बार माँ बनी है। उसकी पहली गर्भावस्था से जन्में 3 सब-एडल्ट शावक स्वस्थ हैं और हाल ही में उसने तीन नए शावकों को जन्म दिया है। ‘वीरा’ अपने 13 माह के शावक के साथ खुले जंगल में विचरण कर रही है, जबकि ‘निर्वा’ अपने 10 माह के तीन शावकों के साथ संरक्षित बाड़े में है। वर्तमान में भारत में 39 चीते हैं। इनमें 36 कूनो नेशनल पार्क में और तीन गांधी सागर अभयारण्य में हैं।