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…जब पंडित धीरेंद्र शास्त्री से लिपटकर खूब रोए नव वर-वधू

छतरपुर, 15 फरवरी । मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित प्रसिद्ध बागेश्वर धाम में महाशिवरात्रि के अवसर पर सामूहिक विवाह समारोह में 305 जोड़े परिणय सूत्र में बंध गए। दोपहर में धाम में आयोजित वरमाला केे बाद पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री से आशीर्वाद लेने के दौरान वर-वधु भावुक हो गए और उनसे लिपटकर रोने लगे।

बागेश्वर धाम में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में रविवार को दोपहर में वरमाला का कार्यक्रम हुआ। इस दौरान वर वधू को वरमाला के लिए 30-30 की संख्या मंच पर बुलाया गया। मंत्रोच्चार के बीच दूल्हा-दुल्हन ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई। पहले दुल्हन ने दूल्हे के गले में माला डाली, फिर दूल्हे ने दुल्हन के गले में माला डाली। वरमाला के दौरान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दूल्हा-दुल्हन को आशीर्वाद दिया। कुछ दूल्हा-दुल्हन भावुक हो गए। कुछ दुल्हनें बाबा से गले मिलकर रो पड़ीं, जबकि कुछ दूल्हे बाबा के पैरों में गिरकर रोने लगे और भावुक होकर आशीर्वाद लिया। मंच पर देशभर से साधु-संत मौजूद रहे।

रामभद्राचार्य बोले- अगली बार धीरेंद्र शास्त्री की शादी में आऊंगा

समारोह में शामिल जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज भी शामिल हुए। उन्होंने वरमाला के दौरान कहा कि इस बार मैं इस शादी के लिए आया हूं। अब मैं 29 जून से 13 जनवरी तक एकांतवास में जा रहा हूं। मुझे लगता है कि अगले साल जब मैं आऊंगा, तो धीरेंद्र शास्त्री की शादी में आऊंगा। उन्होंने आगे कहा कि जब तक कैंसर हॉस्पिटल पूरा नहीं हो जाता, तब तक सामूहिक विवाद कार्यक्रम नहीं होंगे। अगली बार हम 1001 लड़कियों की शादी कराएंगें। दुआ करें कि अगली बार मैं जब आऊं, तो एक रिश्तेदार के तौर पर आऊं।

इस दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य समारोह को शादी शब्द प्रयोग पर नाराज भी हुए। उन्होंने तीखे स्वर में कहा कि पूर्व वक्ताओं ने एक बात कही जो मुझे अच्छी नहीं लगी। यहां शादी नहीं हो रही है। तुमने बार-बार शादी शब्द का प्रयोग किया है। यहां शादी नहीं हो रही है, यहां ब्रह्म विवाह हो रहा है। उन्होंने मनुस्मृति का जिक्र करते हुए कहा कि मनुस्मृति में 8 विवाह कहे गए हैं। उनमें से ब्रह्म विवाह सबसे श्रेष्ठ बताया गया है।

बागेश्वर धाम में हो रहे सामूहिक विवाह समारोह में नौ देशों के राजदूत शामिल हुए। इनमें उरुग्वे के अल्बर्टो एंटोनियो गुआनी अमरिला,अर्जेंटीना के मारियानो अगस्टिन कजिनो, पैराग्वे के फ्लेमिंग राउल डुआर्टे रामोस, इक्वाडोर के फर्नांडो एक्स. बुचेली वर्गास, चिली की वर्जीनिया पेट्रीसिया एन व्रीस, पेरू के जेवियर मैनुअल पॉलिनिच वेलार्डे, अल साल्वाडोर के गुइलेर्मो रुबियो फ्यूनेस, पनामा के अलोंसो कोरेया मिगुएल, सूरीनाम की सुनैना परीक्षा रागनीदेवी मोहन शामिल हुए हैं। सभी देशों के राजदूत मंच पर मौजूद रहे।

समारोह के मुख्य व्यवस्थापक धीरेंद्र गौर ने बताया कि यह लगातार सातवां आयोजन है। इस समारोह में ऐसी कन्याओं का विवाह हो रहा है, जो बहुत गरीब परिवार से आते हैं। इनमें से कुछ के सिर से पिता का साया उठ गया है या फिर उनकी मां नहीं है। समारोह में एक नेपाली जोड़ा भी शादी कर रहा है। शादी नेपाली और भारतीय दोनों रीति-रिवाजों से हो रही है।

उन्होंने बताया कि समारोह में दोपहर करीब 3 बजे के बाद मंडप में सात फेरे होंगे। बनारस से आए 300 ब्राह्मण रीति-रिवाजों के साथ पूजा पाठ करवाएंगे। इसी दौरान एक तरफ बारातियों के लिए बुफे की व्यवस्था की गई है। इसमें दोनों पक्षों के 25-25 सदस्यों को भोजन पास भी दिए गए हैं। शाम को विदाई की रस्म शुरू होगी। बारी-बारी से जोड़े को उपहार सामग्री देकर विदा किया जाएगा। यहां पांच मंडलों के 550 सेवादारों की टीम लगाई गई हैं, जो जोड़ों के आगमन से लेकर विदाई तक की जिम्मेदारी संभाले हैं।

उन्होंने बताया कि बागेश्वर धाम में इस बार नव दंपत्ति को बाइक और होम आटा-चक्की नहीं दी जा रही है। इन दो उपहार से नए परिवार का खर्च बढ़ रहा था, इसलिए इस बार प्रत्येक जोड़े को 30- 30 हजार की फिक्स डिपॉजिट (एफडी) दी जा रही है। इसके साथ ही सोने की लौंग और बाली, मंगलसूत्र के साथ दुल्हन को श्रृंगार और ढाई लाख रुपए का घर-गृहस्थी के सामान दिया जा रहा है।

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